विश्लेषण | ईरान पर सैन्य हमला अमेरिकी चुनावी मुद्दा कैसे बन गया?
https://parstoday.ir/hi/news/world-i147508-विश्लेषण_ईरान_पर_सैन्य_हमला_अमेरिकी_चुनावी_मुद्दा_कैसे_बन_गया
पार्सटुडे – ईरान पर सैन्य आक्रमण अब वाशिंगटन में केवल एक विदेश नीति का मामला नहीं है, बल्कि एक आंतरिक मुद्दा बन गया है जो पेट्रोल की कीमत, जीवन-यापन की लागत, कांग्रेस के अधिकार और यहाँ तक कि अमेरिकी मध्यावधि चुनाव के माहौल को भी प्रभावित कर रहा है।
(last modified 2026-10-04T10:23:56+00:00 )
Oct ०४, २०२६ १५:५० Asia/Kolkata
  • ईरान के साथ युद्ध के कारण अमेरिका में असंतोष
    ईरान के साथ युद्ध के कारण अमेरिका में असंतोष

पार्सटुडे – ईरान पर सैन्य आक्रमण अब वाशिंगटन में केवल एक विदेश नीति का मामला नहीं है, बल्कि एक आंतरिक मुद्दा बन गया है जो पेट्रोल की कीमत, जीवन-यापन की लागत, कांग्रेस के अधिकार और यहाँ तक कि अमेरिकी मध्यावधि चुनाव के माहौल को भी प्रभावित कर रहा है।

पत्रिका फॉरेन पॉलिसी ने इस बारे में लिखा है कि जिस युद्ध पर महीनों तक सैन्य लक्ष्यों, ईरान के परमाणु कार्यक्रम, प्रतिरोधक क्षमता और वार्ता की भाषा में विचार किया जाता था, अब तीन नवंबर के निकट आने के साथ, यह अमेरिकी घरेलू राजनीतिक विवाद के केंद्र में प्रवेश कर गया है; जहाँ चुनावी कैलेंडर स्वयं युद्ध के राजनीतिक और कूटनीतिक माहौल का हिस्सा बन गया है। इस बदलाव का महत्व मध्यावधि चुनाव की प्रकृति में निहित है। तीन नवंबर को प्रतिनिधि सभा की सभी 435 सीटें और सीनेट की लगभग एक-तिहाई सीटें मतदान के लिए रखी जाएंगी और इसका परिणाम यह तय करेगा कि ट्रंप के राष्ट्रपति काल के अंतिम दो वर्षों में कांग्रेस सरकार की नीति को कितना चुनौती दे सकती है, उसका वित्तपोषण कर सकती है, जाँच कर सकती है या उसके निर्माण में भूमिका निभा सकती है। इसलिए अमेरिका का ईरान पर सैन्य आक्रमण चुनावी परिणाम बनने से पहले एक चुनावी मुद्दा बन गया है।

 

युद्ध तब अमेरिकी मतदाता के लिए एक आंतरिक मुद्दा बन जाता है जब वे इसके प्रभाव अपने दैनिक जीवन में महसूस करते हैं। पश्चिम एशिया में ऊर्जा प्रवाह में व्यवधान ने पेट्रोल की कीमत बढ़ा दी है और माल ढुलाई की लागत बढ़ा दी है। एसोसिएटेड प्रेस और KFF के दो हज़ार से अधिक पंजीकृत ग्रामीण मतदाताओं के संयुक्त सर्वेक्षण से पता चलता है कि उनमें से 42 प्रतिशत का मानना है कि चुनावी उम्मीदवारों को ईरान के साथ संघर्ष के बारे में बात करनी चाहिए; ग्रामीण डेमोक्रेट्स के बीच यह आँकड़ा 57 प्रतिशत तक पहुँचता है। हालाँकि, जीवन-यापन की लागत अभी भी अधिक महत्वपूर्ण है, 69 प्रतिशत ने कहा कि उम्मीदवारों का इस मुद्दे पर ध्यान देना उनके लिए बहुत महत्वपूर्ण है।

 

अमेरिकी मतदाता के लिए ईरान के साथ वार्ता के विवरण का पालन करना आवश्यक नहीं है। पेट्रोल की कीमत बढ़ना या माल ढुलाई की लागत बढ़ना पर्याप्त है ताकि हज़ारों किलोमीटर दूर का युद्ध चुनावी अभियानों में एक आंतरिक मुद्दा बन जाए। कांग्रेस भी अब खुद को इस मामले से अलग नहीं कर सकती। अमेरिकी सीनेट ने 24 सितंबर को ईरान के साथ संघर्ष से अमेरिकी सैनिकों की वापसी के लिए युद्ध शक्तियों के प्रस्ताव को 49 पक्ष में बनाम 50 विपक्ष में खारिज कर दिया। चार रिपब्लिकन सीनेटरों का डेमोक्रेट्स में शामिल होना दिखाता है कि ईरान युद्ध धीरे-धीरे राष्ट्रपति की शक्तियों की सीमा और कांग्रेस की भूमिका के बारे में एक मुद्दा बन गया है।

 

दूसरी ओर ट्रंप ने भी संभावित समझौते के समय को चुनाव से जोड़कर इस संबंध को और स्पष्ट कर दिया है। उन्होंने 22 सितंबर को संयुक्त राष्ट्र महासभा में कहा कि उन्हें उम्मीद है कि अमेरिका नवंबर के चुनावों के बाद ईरान के साथ समझौते पर पहुँच जाएगा। रॉयटर्स की रिपोर्ट, जो होर्मुज़ जलडमरूमध्य और आर्थिक दबावों में कमी के बारे में तेहरान और वाशिंगटन के बीच एक चरणबद्ध समझौते की जाँच के बारे में थी, ने भी दिखाया कि कूटनीति का समय और चुनावी कैलेंडर पहले से अधिक एक बिंदु पर मिल गए हैं।

 

बेशक ये घटनाक्रम अकेले यह साबित नहीं करते कि वाशिंगटन ने चुनावी प्रेरणा से वार्ता में देरी की है। शांतिपूर्ण परमाणु कार्यक्रम के मुद्दे, प्रतिबंधों, होर्मुज जलडमरूमध्य और किसी भी समझौते की शर्तों पर वास्तविक मतभेद अभी भी बने हुए हैं लेकिन जब अमेरिकी राष्ट्रपति खुले तौर पर समझौते के समय को चुनाव से जोड़ते हैं तो चुनाव अब कूटनीति का हाशिया नहीं, बल्कि कूटनीतिक निर्णय लेने के माहौल का हिस्सा है।

 

यह स्थिति अमेरिका की दोनों प्रमुख पार्टियों के लिए भी चुनौती पैदा करती है। रिपब्लिकनों को युद्ध के लक्ष्यों और लागतों के बारे में जवाब देना होगा और डेमोक्रेट्स को सरकार के प्रदर्शन की आलोचना के अलावा ईरान और तनाव बढ़ने के खतरे के बारे में अपना रुख स्पष्ट करना होगा। परिणामस्वरूप, युद्ध को केवल एक दलीय द्वंद्व तक सीमित नहीं किया जा सकता। जो युद्ध राष्ट्रीय सुरक्षा के शीर्षक से शुरू हुआ, वह अब घरेलू राजनीति की आवश्यकताओं के दबाव में है। ईरान पर सैन्य आक्रमण तब अमेरिका का आंतरिक मुद्दा बना जब इसकी लागतें युद्ध के मैदान से आगे बढ़कर मतदान के मैदान तक पहुँच गईं; इस बिंदु से आगे वाशिंगटन की विदेश नीति को उसकी घरेलू राजनीति से अलग नहीं देखा जा सकता। mm