जेसीपीओए और अमरीका की दुश्मनी के बारे में वरिष्ठ नेता के विचार
इस्लामी क्रांति के वरिष्ठ नेता ने ईरान के साथ अमरीकियों के रवैये को हमेशा ही दुष्टतापूर्ण और शत्रुता पर आधारित बताया और कहा कि जेसीपीओए के संबंध में उन्होंने अपने वादों का अहम भाग पूरा नहीं किया है।
आयतुल्लाहिल उज़मा सैयद अली ख़ामेनेई ने बुधवार की शाम देश के सिविल व सैन्य उच्चाधिकारियों से मुलाक़ात में जेसीपीओए और ईरान से अमरीका की दुश्मनी के बारे में महत्वपूर्ण बिंदुओं का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि अमरीका में राष्ट्रपति चुनाव के प्रत्याशी धमकी दे रहे हैं कि वे परमाणु समझौते को फाड़ देंगे और अगर अमरीका ने एेसा किया तो इस्लामी गणतंत्र ईरान उसे आग लगा देगा। संयुक्त समग्र कार्य योजना या जेसीपीओए जनवरी महीने से लागू हो चुकी है और वार्ता के दोनों पक्ष इस बात पर कटिबद्ध हुए हैं कि परमाणु समझौतों में वर्णित वादों का पालन करते हुए परस्पर क़दम उठाएंगे। जेसीपीओए में भी सभी समझौतों की तरह कुछ अच्छे व कुछ कमज़ोर बिंदु हैं और इस्लामी क्रांति के वरिष्ठ नेता के शब्दों में इसके अस्पष्ट आयामों ने दूसरे पक्ष को ग़लत लाभ उठाने का मौक़ा दे दिया है।
ईरान ने इस बात को स्वीकार किया था कि उसके द्वारा यूरेनियम का बीस प्रतिशत संवर्धन बंद करने, सेंट्रीफ़्यूज मशीनों की संख्या में कमी करने और अराक के भारी पानी के संयंत्र को फिर से डिज़ाइन करके बनाने के बदले में उस पर लगे प्रतिबंध पूरी तरह से हटा लिए जाएंगे तथा उसका बैंकिंग लेन-देन और अंतर्राष्ट्रीय व्यापार पहले की तरह बहाल हो जाएगा। ईरान ने अपनी कटिबद्धताओं का पालन किया लेकिन दूसरा पक्ष विशेष कर अमरीका अपने वादे पूरे नहीं कर रहा है। ईरान से वर्चस्ववादी व्यवस्था और उसमें सबसे आगे अमरीका की दुश्मनी के दृष्टिगत ईरान द्वारा अपनी वैज्ञानिक क्षमताओं और आर्थिक व रक्षात्मक योग्यताओं में निरंतर वृद्धि, शत्रु के षड्यंत्रों को विफल बनाने के लिए ज़रूरी है। (HN)