ईरानी सेना के प्रवक्ता: अमेरिका रणनीतिक अकेलापन का शिकार हो गया है
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ब्रिगेडियर जनरल अकरमी निया, ईरानी सेना के प्रवक्ता
पार्स टुडे – ईरानी सेना के प्रवक्ता ने यह कहते हुए कि द्वितीय विश्व युद्ध के बाद पहली बार अमेरिका रणनीतिक अकेलेपन का शिकार हो गया है, कहा: ईरान के विरुद्ध अवैध युद्ध छेड़ने में अमेरिका का उद्देश्य ईरानी-इस्लामी सभ्यता को नष्ट करना है।
पार्स टुडे के अनुसार ईरानी सेना के प्रवक्ता अमीर ब्रिगेडियर अकरमी निया ने बुधवार को अपने संबोधन में कहा: ईरान की इस्लामी गणराज्य की सेना और अन्य देशों की सेनाओं के बीच एक महत्वपूर्ण अंतर ईश्वरीय विश्वास और आध्यात्मिकता का होना है, इसलिए सेना के वैचारिक-राजनीतिक संगठन ने सेना में आध्यात्मिक वातावरण और विमर्श के निर्माण में प्रभावी भूमिका निभाई है।
उन्होंने आगे हाल के युद्ध में ईरान के विरुद्ध दुश्मनों के कायरतापूर्ण आक्रमण का उल्लेख करते हुए स्पष्ट किया: दुश्मन जो झूठे आख्यान गढ़कर ख़ुद को विजयी दिखाने की कोशिश करता है, उसे रोका जाना चाहिए, और इस संबंध में समाज के सांस्कृतिक तत्वों की बहुत महत्वपूर्ण ज़िम्मेदारी है।
ब्रिगेडियर अकरमी निया ने शक्ति के उत्पादन, विशेष रूप से सॉफ़्ट पावर के उत्पादन के महत्व के बारे में कहा: सॉफ़्ट पावर बीसवीं सदी के अंत में सैन्य साहित्य और अंतर्राष्ट्रीय संबंधों में प्रवेश कर चुकी है और यह हार्ड पावर की पूरक और सुदृढ़कर्ता है और सेना में सॉफ़्ट पावर का उत्पादन अत्यंत महत्वपूर्ण है।
उन्होंने आगे अमेरिकी विदेश मंत्री की हाल की टिप्पणियों का उल्लेख करते हुए कहा: अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो का यूनान के एक्रोपोलिस में हाल का भाषण, सॉफ़्ट पावर की नींव को कमज़ोर करने के दुश्मन के प्रयासों की निरंतरता है। अमेरिकी विदेश मंत्री के बयान ने हमेशा की तरह यह दावा करने के विपरीत कि अमेरिका की दुश्मनी केवल इस्लामी गणराज्य की व्यवस्था से है और अमेरिका को सभ्य ईरानी जनता से कोई समस्या नहीं है, इस देश के पाखंडी चेहरे से नक़ाब उतार दिया और अमेरिका की सभ्यता-विरोधी प्रकृति और साम्राज्यवादी स्वभाव को दिखा दिया। अमेरिका के शासकों का वर्तमान युद्ध छेड़ने का उद्देश्य ईरानी-इस्लामी सभ्यता को नष्ट करना है, न कि केवल ईरान की इस्लामी गणराज्य की व्यवस्था को गिराना।
ईरानी सेना के प्रवक्ता ने आगे कहा: अमेरिकी नेताओं ने सोचा था कि इस्लामी क्रांति के नेता और सैन्य कमांडरों को शहीद करके वे ईरानी जनता को डरा कर और समर्पण करा सकते हैं लेकिन ईरान की दूरदर्शी और बहादुर जनता ने अपने ऐतिहासिक प्रतिरोध से दुश्मनों को आश्चर्यचकित और नाकाम कर दिया। mm