जेसीपीओए को लागू करने के संबंध में पश्चिम का विरोधाभासी व्यवहार
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ईरान और गुट पांच धन एक के बीच हुए परमाणु समझौते जेसीपीओए को लागू करने के संबंध में पश्चिम का विरोधाभासी व्यवहार जारी है।
(last modified 2023-04-09T02:55:50+00:00 )
Jul ०९, २०१६ १२:४७ Asia/Kolkata

ईरान और गुट पांच धन एक के बीच हुए परमाणु समझौते जेसीपीओए को लागू करने के संबंध में पश्चिम का विरोधाभासी व्यवहार जारी है।

इसी परिप्रेक्ष्य में संयुक्त राष्ट्र महासचिव बान की मून ने जेसीपीओए के अनुच्छेदों की बिना जानकारी के ईरान के मीज़ाईल कार्यक्रम को जेसीपीओए के मिज़ाज से असमन्वित कहा। बान की मून का यह बयान ऐसी स्थिति में है कि जेसीपीओए में ईरान के मीज़ाईल कार्यक्रम के बारे में कोई बातचीत नहीं हुयी। ईरान ने अपनी मीज़ाईल क्षमता को लाल रेखा घोषित किया है।

जेसीपीओए के लागू हुए कुछ महीने के बाद भी इसके पूरी तरह लागू होने के मार्ग में कुछ चुनौतियां मौजूद हैं।

इस्लामी गणतंत्र ईरान बारंबार यह एलान कर चुका है कि उसका मीज़ाईल कार्यक्रम पूरी तरह रक्षात्मक आयाम पर आधारित है। इस कार्यक्रम में परमाणु वारहेड्स की कोई गुंजाइश नहीं है इसलिए संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के प्रस्ताव नंबर 2231 का इससे उल्लंघन नहीं होता। इसी प्रकार इस मीज़ाईल कार्यक्रम का जेसीपीओए से कोई संबंध नहीं है।

अमरीकी प्रतिनिधि सभा का हालिया बिल जो ईरान को विमान बेचने पर रोक से संबंधित है, यह दर्शाता है कि अमरीकी प्रशासन में कुछ लोग ऐसे हैं जो जेसीपीओए से राज़ी नहीं हैं। यह बिल अमरीका द्वारा ईरान पर दबाव डाले जाने की मिसाल है क्योंकि अमरीकियों को लगता है कि ईरान के ख़िलाफ़ पाबंदियां प्रभावी रहीं हैं और यह प्रक्रिया जारी रहे।

अमरीका में रिपब्लिकन्ज़ और कुछ डेमोक्रेट्स भी चाहते हैं कि ईरान के ख़िलाफ़ पाबंदियां जारी रहे ताकि शायद ईरान ऐसा क़दम उठाए जो अमरीकियों के ग़ैर ज़िम्मेदाराना व्यवहार का औचित्य बन सके। साथ ही जेसीपीओए के लागू होने के 6 महीने बाद भी कि जिसके दौरान ईरान के दुनिया के साथ संबंध बेहतर हुए हैं, जेसीपीओए के लागू होने की प्रक्रिया को लेकर चिंता बनी हुयी है। (MAQ/T)