ईरान की संपत्ति लूटने की अमरीका की नीति यथावत जारी
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परमाणु समझौते के बाद भी अमरीका, इस्लामी गणतंत्र ईरान के विरुद्ध अपनी शत्रुतापूर्ण नीतियां विभिन्न शैलियों से जारी रखे हुए है।
(last modified 2023-04-09T02:55:50+00:00 )
Sep २६, २०१६ १२:१६ Asia/Kolkata

परमाणु समझौते के बाद भी अमरीका, इस्लामी गणतंत्र ईरान के विरुद्ध अपनी शत्रुतापूर्ण नीतियां विभिन्न शैलियों से जारी रखे हुए है।

अमरीका के विदेश मंत्रालय ने इस देश में ईरान की इमारतों को किराए पर दे दिया है। न्यूयार्क टाइम्ज़ ने अपनी एक रिपोर्ट में लिखा है कि इन इमारतों का मूल्य पांच करोड़ डाॅलर से अधिक है। पत्र के अनुसार किसी समय न्यूयार्क में ईरान का वाणिज्य दूतावास रही पांच मंज़िला इमारत को पेंटिंग बेचने के केंद्र में बदल दिया गया है जबकि पहले मेरीलैंड में ईरानी कूटनयिकों की एक इमारत इस समय एक पांच सदस्यीय परिवार का घर है।

 

अमरीका में ईरान के विरुद्ध व्यापक स्तर पर कार्यवाहियां की जा रही हैं। अप्रैल में अमरीका के उच्चतम न्यायालय ने अपने एक फ़ैसले में अमरीकी अदालतों को इस बात की अनुमति दी थी कि वे आतंकवादी कार्यवाहियों के पीड़ित लोगों की सुनवाई करते हुए ईरान की ज़ब्त की गई संपत्ति में से उन्हें हर्जाना दे सकती हैं। अमरीका के कुछ रिपब्लिकन सांसद भी इस बात की मांग कर रहे हैं कि ईरान पर प्रतिबंध लगाने के क़ानूनों की समय सीमा बढ़ाई जाए। इसी तरह परमाणु समझौते के क्रियान्वयन के बावजूद अमरीका ने ईरान पर लगे प्रतिबंधों एक भाग को नहीं उठाया है और विदेशी बैंकों के साथ ईरान के लेन-देन में अब भी रुकावटें मौजूद हैं। ईरान के राष्ट्रपति डाॅक्टर हसन रूहानी ने अमरीका के इस रवैये पर प्रतिक्रिया जताते हुए विदेश मंत्रालय को बाध्यकारी आदेश दिया था कि वह अमरीका की कार्यवाहियों से ईरान और ईरानी नागरिकों को होने वाले नुक़सान की भरपाई के लिए क़दम उठाए।

 

राष्ट्रपति ने न्यूयार्क की अपनी हालिया यात्रा में ईरान की संपत्तियों को ज़ब्त करने की अमरीका की कार्यवाही को खुली हुई चोरी बताया था और कहा था कि अमरीका पर अविश्वास के लिए ईरानी राष्ट्र के पास अनेक तर्क हैं। वास्तिवकता यह है कि ईरान से अमरीका की दुश्मनी सिर्फ़ परमाणु मामले तक सीमित नहीं है बल्कि वह हर अवसर से ईरान को नुक़सान पहुंचाने के लिए लाभ उठाना चाहता है। इस्लामी क्रांति के वरिष्ठ नेता के शब्दों में ईरान की संपत्तियों को ज़ब्त करने की अमरीका की कार्यवाही यह दर्शाती है कि उसकी प्रवृत्ति में कोई अंतर नहीं आया है। (HN)