सेना अपनी भूमिका अदा करने के लिए हमेशा तैयार रहेः वरिष्ठ नेता
इस्लामी क्रांति के वरिष्ठ नेता ने सशस्त्र सेना की नैतिक, वैज्ञानिक व अनुशासनात्मक तैयारी और पवित्र प्रतिरक्षा काल के अनुभवों को युवा सैनिकों तक स्थानांतरित करने की आवश्यकता पर बल दिया है।
सशस्त्र सेना के सुप्रीम कमांडर आयतुल्लाहिल उज़मा सैयद अली ख़ामेनेई ने बुधवार को शहीद सत्तारी कैडिट काॅलेज की पासिंग आउट परेड के अवसर पर कहा कि इस्लामी गणतंत्र ईरान की सेना को हमेशा तैयार रहना चाहिए ताकि ज़रूरत के समय अपनी भूमिका सही ढंग से अदा कर सके। उन्होंने इस बात का उल्लेख करते हुए कि इस्लाम, स्वाधीनता व उच्च मान्यताओं पर आग्रह के कारण ईरानी राष्ट्र को आज दुश्मनों के एक बड़े मोर्चे का सामना है, कहा कि पवित्र प्रतिरक्षा का काल एक कठिन इम्तेहान था जिसमें ईरानी सेना के गुण खुलकर सामने आए और उसने अनेक महान कारनामे अंजाम दिए।
इस्लामी क्रांति के वरिष्ठ नेता ने कहा कि थोपा गया आठ वर्षीय युद्ध वास्तव में एक अंतर्राष्ट्रीय युद्ध और ईरान की सीमाओं, उसकी पहचान, मान्यताओं, इस्लामी व्यवस्था और जनता की क्रांति पर बड़ी ताक़तों और उनके क्षेत्रीय व अंतर्राष्ट्रीय पिट्ठुओं का व्यापक हमला था। आयतुल्लाहिल उज़मा सैयद अली ख़ामेनेई ने कहा कि सैन्य काॅलेजों का एक ज़रूरी क़दम यह है कि वे युवा बलों को पवित्र प्रतिरक्षा काल के वातावरण और उस समय की परिस्थितियों से अवगत कराएं। उन्होंने कहा कि आज दोस्त व दुश्मन सहित पूरी दुनिया ईरानी राष्ट्र व इस्लामी व्यवस्था की महानता, बुद्धिमत्ता, साहस और शक्ति को स्वीकार करती है। (HN)