फ़ार्स की खाड़ी सहयोग परिषद के बयान पर ईरान का जवाब
ईरान के विदेश मंत्रालय ने कहा है कि सीरिया, यमन, बहरैन, इराक़ व लीबिया की दुखद स्थिति उन देशों के हस्तक्षेप का नतीजा है जो रियाज़ में एकत्रित हुए हैं और अब दूसरों पर आरोप लगा कर अपनी ग़लत नीतियों पर पर्दा डालना चाहते हैं।
विदेश मंत्रालय ने एक बयान में रियाज़ में फ़ार्स की खाड़ी सहयोग परिषद व तुर्की के विदेश मंत्रियों की संयुक्त बैठक में जारी होने वाले बयान पर जवाब देते हुए कहा है कि इस्लामी गणतंत्र ईरान, मध्यपूर्व को परमाणु शस्त्र रहित क्षेत्र बनाने का प्रस्ताव देने वाला पहला देश है और अगर ये देश अपनी कथनी और करनी में सच्चे हैं तो वह इनके साथ इस संबंध में सहयोग के लिए तैयार है। इस बयान में कहा गया है कि जिन देशों के हस्तक्षेप के कारण अन्य देशों में अशांति, युद्ध और आतंकवाद में वृद्धि हुई है और जिन्होंने अपने पड़ोसी देशों की संप्रभुता का उल्लंघन किया है वे दूसरों को क्षेत्र के मामलों में हस्तक्षेप न करने की नसीहत नहीं कर सकते।
ईरानी विदेश मंत्रालय ने सीरिया के हलब क्षेत्र को आतंकियों से मुक्त कराने की कोशिशों पर इन देशों की एकपक्षीय प्रतिक्रिया के बारे में कहा कि ये देश एेसी स्थिति में आतंकियों का समर्थन कर रहे हैं कि जब हलब सहित सीरिया के अनेक क्षेत्रों को इन आतंकियों ने अपने घेरे में ले रखा है और वे वहां अत्यंत जघन्य और अमानवीय अपराध कर रहे हैं। ज्ञात रहे कि गुरुवार को रियाज़ में फ़ार्स की खाड़ी सहयोग परिषद व तुर्की के विदेश मंत्रियों की संयुक्त बैठक में जारी होने वाले बयान के कुछ हिस्सों में ईरान पर निराधार आरोप लगाए गए हैं। (HN)