फ़ार्स की खाड़ी की सहयोग परिषद के बयान पर ईरान की प्रतिक्रिया
https://parstoday.ir/hi/news/iran-i26251-फ़ार्स_की_खाड़ी_की_सहयोग_परिषद_के_बयान_पर_ईरान_की_प्रतिक्रिया
ईरान का मानना है कि मध्यपूर्व में संकट का मुख्य कारण कुछ देशों का वर्चस्ववाद और उनके द्वारा अतिवादी गुटों का समर्थन है।
(last modified 2023-04-09T02:55:50+00:00 )
Oct १६, २०१६ १५:२५ Asia/Kolkata
  • फ़ार्स की खाड़ी की सहयोग परिषद के बयान पर ईरान की प्रतिक्रिया

ईरान का मानना है कि मध्यपूर्व में संकट का मुख्य कारण कुछ देशों का वर्चस्ववाद और उनके द्वारा अतिवादी गुटों का समर्थन है।

ईरान के विदेशमंत्रालय का कहना है कि क्षेत्रीय संकट का मुख्य कारण कुछ देशों द्वारा आतंकवादी गुटों का समर्थन और उनका वर्चस्ववाद है।

विदेशमंत्रालय ने एक बयान जारी करके कहा है कि लीबिया, बहरैन, इराक, सीरिया और यमन की संकटग्रस्त स्थिति उन देशों के बयानों से बिल्कुल विपरीत है जो रियाज़ में एकत्रित होकर घोषणापत्र जारी कर रहे हैं।  इस बयान के अनुसार फ़ार्स की खाड़ी की सहयोग परिषद के दावे के विपरीत, क्षेत्रीय देशों में पाए जाने वाले संकट उन्हीं देशों के हस्तक्षेप का परिणाम हैं जो रियाज़ में एकत्रित हुए हैं और दूसरों पर आरोप मढ़ रहे हैं।

 फ़ार्स की खाड़ी की सहयोग परिषद और तुर्की ने क्षेत्रीय परिवर्तनों के बारे में एक बयान जारी करके ईरान पर आरोप लगाया है कि वह अरब देशों में मामलों में हस्तक्षेप कर रहा है।  ईरान पर हस्तक्षेप का यह आरोप एेसी स्थिति में लगाया जा रहा है कि जब तुर्की और सऊदी अरब के सैनिक अवैध ढंग से इराक़, सीरिया और यमन में उपस्थित हैं।  इसके अतिरिक्त फ़ार्स की खाड़ी की सहयोग परिषद के कुछ सदस्य देश सीरिया, लीबिया, इराक़ और यमन में सक्रिय आतंकवादियों का खुलकर आर्थिक समर्थन कर रहे हैं।  इससे पहले भी फ़ार्स की खाड़ी की सहयोग परिषद ने यह आरोप लगाया था कि ईरान, यमन की सैन्य सहायता कर रहा है।  इस निराधार आरोप से उसने यमन पर सऊदी गठबंधन के आक्रमण का औचित्य दर्शाने का प्रयास किया था जिसके कारण हज़ारों निर्दोष लोग मारे जा चुके हैं।

अमरीका और तुर्की का समर्थन प्राप्त अरब गठबंधन को जब भी सीरिया और इराक़ में पराजय का सामना होता है तो वह आम जनमत को दिगभ्रमित करने के लिए ईरान पर दोषारोपण का काम शुरू कर देता है।  इस प्रकार वे अपनी ग़लतियों की ज़िम्मेदारी दूसरों पर डालने के प्रयास करते हैं।  उधर इराक़, सीरिया और यमन की जनता ने यह सिद्ध कर दिया है कि हर प्रकार के दबावों के बावजूद वह किसी भी स्थति में प्रतिरोध का मार्ग नहीं छोड़ेगी।