ईरान-यूरोपीय संघ के बीच सहयोग की नई स्ट्रैटिजी
हालिया दिनों में तेहरान यूरोपीय देशों के अधिकारियों व शिष्टमंडलों का मेज़बान रहा है।
बोस्निया हर्ज़ेगोविना की प्रेज़िडेन्सी के चेयरमैन और फ़िनलैंड के राष्ट्रपति का तेहरान दौर के साथ साथ ईरान के संबंध में यूरोपीय संघ की नई स्ट्रैटिजी का प्रस्ताव पारित होना, ईरान-यूरोपीय संघ के बीच संबंध के नए अध्याय के शुरु होने का सूचक है।
मंगलवार को यूरोपीय संघ ने परमाणु समझौते जेसीपीओए के बाद ईरान के संबंध में नई स्ट्रैटिजी के प्रस्ताव को पारित किया।
90 के दशक के शुरु से ईरान-यूरोपीय संघ के बीच संबंध में अनेक बार उतार चढ़ाव दिखने में आए यहां तक कि संबंध की रेल जेसीपीओए के प्लेटफ़ार्म पर पहुंची और परमाणु समझौता संबंधों को फिर से परिभाषित करने के लिए निर्णायक बिन्दु बना। हालांकि यूरोपीय संघ ने ईरान के परमाणु कार्यक्रम के संबंध में सावधानी भरा व्यवहार अपनाया और वे ईरान के परमाणु कार्यक्रम के शांतिपूर्ण न होने पर आधारित अमरीका के दावे पर बहुत हद तक सहमत नहीं थे, इसके बावजूद यूरोपीय संघ ने ईरान से तेल ख़रीदने पर पाबंदी सहित पाबंदियों के प्रस्ताव में अमरीका का साथ दिया।
यूरोपीय संघ दुनिया में कई ध्रुवीय व्यवस्था चाहता है। इस दृष्टिकोण से यूरोप के लिए ऊर्जा की आपूर्ति में ईरान की विशिष्ट स्थिति और इसी प्रकार फ़ार्स की खाड़ी में शांति व स्थिरता लाने में ईरान के निर्णायक रोल वे महत्वपूर्ण तत्व हैं जिसने यूरोपीय संघ के निकट ईरान के स्थान को बढ़ा दिया है।
ये वे विशेषताएं हैं जो जेसीपीओए के बाद विदेश नीति में बातचीत का नया माहौल बनने से ईरान के संबंध में यूरोप की मानसिकता में आए बदलाव से पैदा हुयी हैं।
यह सहयोग ईरान के लिए दूसरे आयाम से अहम है। क्योंकि अमरीका जेसीपीओए के बाद भी ईरान के ख़िलाफ़ पाबंदियों को बाक़ी रखने के चक्कर में है। अमरीका ईरान की मीज़ाईल क्षमता को ख़तरा दर्शाकर और मानवाधिकार के उल्लंघन का दावा करके यूरोपीय देशों को अपने साथ मिलाने की कोशिश में है। हालांकि पिछले एक दशक में यूरोपीय संघ को अमरीका का साथ देने के नतीजे में ईरान के साथ सहयोग का अवसर गंवाने के सिवा कुछ नहीं मिला। (MAQ/T)