आतंकवाद से मुकाबले के लिए समस्त देशों की सहकारिता आवश्यक है
निर्धनता व निरक्षता आतंकवाद के फलने- फूलने का एक महत्वपूर्ण कारण है
अफ़्रीकी युनियन की शांति व सुरक्षा आयोग के कमिश्नर ने तेहरान में ईरान के विदेशमंत्री के सहायक से भेंट की है। इस्माईल शरक़ी ने 21 नवंबर को अरब व अफ्रीकी देशों के मामलों में विदेशमंत्री के सहायक व सलाहकार हुसैन जाबिरी अंसारी से भेंट की जिसमें उन्होंने अफ्रीका महाद्वीप के संकटों के समाधान के दिशा में इस संघ की ओर से की जाने वाली कार्यवाहियों के बारे में एक रिपोर्ट पेश की।
इस्माईल शरक़ी ने शांति, सुरक्षा और विकास को अफ्रीक़ी यूनियन के तीन मुख्य लक्ष्य बताये और ईरान के महत्व और उसके पास मौजूद संभावनाओं की ओर संकेत किया और शांति व सुरक्षा स्थापित करने और आतंकवाद से मुकाबले में संयुक्त मार्ग अपनाये जाने के बारे में ईरान की सहकारिता की इच्छा जताई।
इस बात- चीत में दोनों पक्षों ने एक समझौते पर हस्ताक्षर भी किये जिसके अनुसार इस्लामी गणतंत्र ईरान और अफ्रीक़ी यूनियन शांति व सुरक्षा और इनसे जुड़े विभिन्न मामलों में एक दूसरे से सहयोग करेंगे।
अफ्रीकी महाद्वीप में निर्धनता, निरक्षरता और साम्राज्यवाद राजनीतिक ढांचे की कमजोरी का कारण बनी है और इसी प्रकार वह अफ्रीक़ा महाद्वीप में आतंकवाद और अतिवाद के अस्तित्व में आने का कारण बनी है।
हालिया वर्षों में इस संबंध में अफ्रीकी यूनियन ने कार्य करने का प्रयास किया है और इन चुनौतियों की अनदेखी करने के बजाये उसने इनका मुकाबला करने का फैसला किया है। इस आधार पर अफ्रीकी यूनियन सहकारिता में वृद्धि का इच्छुक है।
अलबत्ता इस दिशा में कार्य कठिन है। सैनिक व सुरक्षा की दृष्टि से अफ्रीका को अशांत व युद्धग्रस्त क्षेत्र के रूप में जाना जाता है।
अफ्रीका में अस्थिरता इस बात का कारण बनी है कि इस महाद्वीप के देश संकटों के मुकाबले में वास्तविक भूमिका न निभा सकें। बहरहाल ईरान की विदेशनीति में अफ्रीका का विशेष महत्व है और ईरान अफ्रीकी देशों के साथ परस्पर संबंधों को मज़बूत करके सहकारिता को स्ट्रैटेजिक बना सकता है।
अफ्रीकी यूनियन की बैठक में पर्यवेक्षक देश के रूप में ईरान की उपस्थिति दोनों पक्षों के संबंधों में नया अध्याय हो सकती है।
ईरान के राष्ट्रपति डाक्टर हसन रूहानी ने पिछले महीने तेहरान में दक्षिण अफ्रीक़ा के राष्ट्रपति जैकब ज़ूमा से भेंट में आतंकवाद से मुकाबले की आवश्यकता पर बल दिया और स्पष्ट किया था कि क्षेत्र में टिकाऊ शांति के लिए समस्त देशों के मध्य सहकारिता व समरता आवश्यक है। MM