अमरीकी कांग्रेस का प्रस्ताव जेसीपीओए का खुला उल्लंघनः रूहानी
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इस्लामी गणतंत्र ईरान के राष्ट्रपति डाक्टर हसन रूहानी ने कहा है कि जेसीपीओए के क्रियान्वयन में होने वाले हर प्रकार के उल्लंघनों, विघ्नों और विलंबनों का मुंहतोड़ उत्तर दिया जाएगा।
(last modified 2023-04-09T02:55:50+00:00 )
Dec ०४, २०१६ ११:२८ Asia/Kolkata
  • अमरीकी कांग्रेस का प्रस्ताव जेसीपीओए का खुला उल्लंघनः रूहानी

इस्लामी गणतंत्र ईरान के राष्ट्रपति डाक्टर हसन रूहानी ने कहा है कि जेसीपीओए के क्रियान्वयन में होने वाले हर प्रकार के उल्लंघनों, विघ्नों और विलंबनों का मुंहतोड़ उत्तर दिया जाएगा।

डाक्टर हसन रूहानी ने रविवार को संसद की खुली बैठक में अगले वर्ष का बजट पेश करने के अवसर पर कहा कि ईरान ने कभी भी जेसीपीओए का उल्लंघन नहीं किया है। उन्होंने बल दिया कि ईरान, उल्लंघनों का उचित उत्तर देगा क्योंकि कांग्रेस का हालिया प्रस्ताव, जेसीपीओए का खुला उल्लंघन है जो उससे विरोधाभास रखता है।

राष्ट्रपति रूहानी ने कहा कि जेसीपीओए समझौते में किसी की पराजय नहीं है।  उन्होंने कहा कि ईरान अंतर्राष्ट्रीय सहयोग के विस्तार को अपना अधिकार समझता है।  राष्ट्रपति का कहना था कि ईरान, इस संबंध में किसी भी देश से अनुमति नहीं लेगा।

डाक्टर हसन रूहानी ने अमरीकी कांग्रेस के "डेमैटो" क़ानून के पास होने की ओर संकेत करते हुए कहा कि अंतर्राष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेन्सी की विभिन्न रिपोर्टों से पता चलता है कि ईरान ने जेसीपीओए के क्रियान्वयन में अपने वचनों का पालन किया है।

राष्ट्रपति रूहानी ने कहा कि जेसीपीओए एक अंतर्राष्ट्रीय दस्तावेज़ है जिसकी पुष्टि सुरक्षा परिषद ने भी की है।उन्होंने कहा कि इसके सूक्ष्म क्रियान्वयन से समस्त पक्षों को बहुत अधिक उपल्बधियां प्राप्त होंगी। राष्ट्रपति ने यह बयान करते हुए कि अमरीका के राष्ट्रपति की ज़िम्मेदारी है कि वे ईरान के विरुद्ध प्रतिबंधों की समय सीमा बढ़ाने और प्रतिबंध लागू होने को रोकने के लिए अपने अधिकारों का प्रयोग करें, कहा कि देश की सर्वोच्च राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद और संसद में पास क़ानून की परिधि में, ईरान में जेसीपीओए के क्रियानव्यन पर नज़र रखने वाली समिति की बैठक में महत्वपूर्ण निर्णय लिया जाएगा और जनता को इसकी सूचना दी जाएगी।

ज्ञात रहे कि अमरीकी सेनेट में गुरुवार को ईरान के ख़िलाफ़ पाबंदी क़ानून आईएसए की अवधि 10 साल बढ़ाने का विधेयक पारित हो गया है। इस विधेयक के पक्ष में 99 और विरोध में 1 मत पड़ा। इस विधेयक के लागू होने के लिए अमरीकी राष्ट्रपति बराक ओबामा के दस्तख़त होना ज़रूरी हैं। (AK)