अगले 25 साल में इस्राईल का वजूद नहीं रहेगा, वरिष्ठ नेता
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फ़िलिस्तीन के इस्लामी जेहाद आंदोलन के महासचिव रमज़ान अब्दुल्लाह शलह ने वरिष्ठ नेता आयतुल्लाहिल उज़्मा सय्यद अली ख़ामेनई से मुलाक़ात की।
(last modified 2023-11-29T05:45:15+00:00 )
Dec १४, २०१६ १५:३६ Asia/Kolkata
  • अगले 25 साल में इस्राईल का वजूद नहीं रहेगा, वरिष्ठ नेता

फ़िलिस्तीन के इस्लामी जेहाद आंदोलन के महासचिव रमज़ान अब्दुल्लाह शलह ने वरिष्ठ नेता आयतुल्लाहिल उज़्मा सय्यद अली ख़ामेनई से मुलाक़ात की।

बुधवार को दोपहर में तेहरान में हुयी इस मुलाक़ात में वरिष्ठ नेता ने कहा, “जैसा कि हमने पहले भी कहा है कि ज़ायोनियों के ख़िलाफ़ फ़िलिस्तीनियों और मुसलमानों के एक-जुट संघर्ष से अगले 25 साल में ज़ायोनी शासन का वजूद नहीं रहेगा।” उन्होंने बल दिया कि फ़िलिस्तीन के विषय को भुलाने के लिए ज़ायोनी शासन के समर्थकों की ओर से निरंतर पैदा किए जा रहे संकटों के बावजूद यह पवित्र भूमि फ़िलिस्तीनी गुटों व राष्ट्र के प्रतिरोध के नतीजे में आज़ाद होकर रहेगी।

आयतुल्लाहिल उज़्मा सय्यद अली ख़ामेनई ने बल दिया कि पवित्र क़ुद्स की मुक्ति का सिर्फ़ एक ही रास्ता है और वह प्रतिरोध व संघर्ष है, इसके अलावा किसी भी दूसरे रास्ते का कोई नतीजा नहीं निकलेगा।

उन्होंने इस्लामी जेहाद आंदोलन की ओर से ज़ायोनियों के मुक़ाबले में एकता व प्रतिरोध के लिए 10 सूत्रीय योजना पर ख़ुशी ज़ाहिर करते हुए, संघर्ष जारी रखने, साठगांठ के समझौतों को पूरी तरह निरस्तर करने, फ़िलिस्तीनी गुटों के बीच एकता पर आग्रह और दुश्मन के साथ साठगांठ के लिए कुछ रूढ़ीवादी सरकारों की कोशिशों की निंदा को इस योजना के महत्वपूर्ण बिन्दु बताए।

वरिष्ठ नेता ने अमरीका और उसके कुछ क्षेत्रीय घटकों की ओर से संकटों में धार्मिक तत्व को दाख़िल करने और नाना प्रकार की घटनाएं अंजाम देने की कोशिश का उल्लेख करते हुए कहा कि इस प्रकार के प्रचारों के विपरीत, हलब, मूसिल सहित दूसरे शहरों में सुन्नी मुसलमानों का तकफ़ीरियों के हाथों जनसंहार हुआ और हो रहा है, इसलिए इन संकटों का शिया-सुन्नी से कोई संबंध नहीं है।

आयतुल्लाहिल उज़्मा ख़ामेनई ने कहा कि क्षेत्र का सबसे अहम विषय दाइश, नुस्रा फ़्रंट सहित दूसरे आतंकवादी गुटों से सामूहिक रूप से निपटना है, क्योंकि अगर ऐसा न हुआ तो तकफ़ीरियों की ओर से निरंतर संकट पैदा होने के कारण फ़िलिस्तीन का विषय हाशिये पर चला जाएगा।

उन्होंने अतिग्रहित फ़िलिस्तीन में तकफ़ीरियों की पैठ से पूरी तरह निपटने पर भी बल दिया। वरिष्ठ नेता अपने बयान में निरंतर संघर्ष और कठिनाइयां सहन करने की स्थिति में सफलता को ईश्वर की ओर से किया गया वादा बताते हुए कहा कि सत्य के मोर्चे से दुश्मनी साम्राज्य का स्वभाव है इसलिए इस दुश्मनी के जारी रहने पर हैरत नहीं करनी चाहिए।

इस अवसर पर इस्लामी जेहाद आंदोलन के महासचिव रमज़ान अब्दुल्लाह शलह ने वरिष्ठ नेता और इस्लामी गणतंत्र ईरान के साहसिक दृष्टिकोण और फ़िलिस्तीन के पीड़ित राष्ट्र और आकांक्षा को हिज़्बुल्लाह की ओर से समर्थन पर आभार जताया। उन्होंने कहा कि खेद की बात है कि कुछ अरब सरकारें फ़िलिस्तीन के विषय से पीछे हट गयी हैं और उनमें ज़ायोनी शासन से हाथ मिलाने के लिए प्रतिस्पर्धा शुरु हो गयी है। (MAQ/N)