परमाणु समझौते को लेकर ट्रंप पर बढ़ रहा है दबाव,
इस्लामी गणतंत्र ईरान के रक्षा मंत्री जनरल हुसैन देहक़ान ने कहा है कि परमाणु समझौता का मुद्दा एक राष्ट्रीय विषय है और इस मामले का आधार इस्लामी क्रान्ति के वरिष्ठ नेता के निर्देश हैं।
हुसैन देहक़ान ने मंगलवार की शाम एक बैठक में कहा कि परमाणु समझौते का संबंध केवल सरकार और संसद से नहीं बल्कि सभी विभागों और अधिकारियों ने इस विषय को आगे ले जाने के लिए काम किया है। उन्होंने कहा कि ईरान के परमाणु समझौते के तहत अपनी प्रतिबद्धताओं पर अमल किया है जबकि अमरीका ने अपनी प्रतिबद्धताओं का उल्लंघन किया है क्योकि दुशमन तो दुशमन ही होता है।
उधर यूरोपीय संघ की विदेश नीति प्रभारी और परमाणु समझौते की संयोजक फ़ेड्रीका मोग्रीनी की सहायक हेल्गा श्मिद ने कहा कि अमरीका के नवनिर्वाचित राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप की टीम परमाणु समझौते के बारे में ग़लतफ़हमी का शिकार है। उन्होंने कहा कि ईरान के परमाणु समझौते पर अब नए सिरे से बात करने की कोई ज़रूरत नहीं है।
यूरोपीय संघ का कहना है कि वह चीन और रूस की तरह यही विचार रखता है कि ईरान के साथ हुए परमाणु समझौते की रक्षा की जानी चाहिए।
ट्रंप की ओर से विदेश मंत्रालय के उम्मीदवार रिक्स टेलरसन ने कहा था कि वह परमाणु समझौते की पुनरसमीक्षा के इच्छुक हैं।
ईरान के राष्ट्रपति डाक्टर हसन रूहानी ने मंगलावर को कहा कि ईरान परमाणु समझौते के बारे में ट्रंप प्रशासन के साथ नए सिरे से वार्ता नहीं करेगा।
इसी बीच अमरीका के विदेश मंत्री जान कैरी ने जो कुछ ही दिनों में इस पद से विदा होने वाले हैं कहा कि यदि ट्रंप प्रशासन ने ईरान से हुए परमाणु समझौते को किनारे लगाया तो अमरीका को नुक़सान उठाना पड़ेगा। जबकि वाइट हाउस के प्रवक्ता जाश अर्नेस्ट ने कहा कि ओबामा सरकार ने इस बात की कोई गैरेंटी नहीं दी है कि ट्रंप के शासन काल में भी परमाणु समझौता सुरक्षित रहेगा। प्रवक्ता ने इसके साथ ही यह भी कहा कि उन्हें नहीं लगता कि ट्रंप सरकार ईरान के साथ हुए परमाणु समझौते को नुक़सान पहुंचाएगी क्योंकि यह द्विपक्षीय समझौता नहीं एक अंतर्राष्ट्रीय समझौता है।
चीन के विदेश मंत्रालय की प्रवक्ता ने भी कहा कि आईएईए और संयुक्त राष्ट्र संघ ने ईरान की परमाणु गतिविधियों के शांतिपूर्ण होने की पुष्टि कर दी है अतः इस समझौते को इसी तरह बाक़ी रखा जाना चाहिए।