ईरानी राष्ट्रपति के ओमान और कुवैत दौरे की अहमियत
ईरानी राष्ट्रपति के ओमान और कुवैत दौरे की अहमियत
ईरानी राष्ट्रपति हसन रूहानी का ओमान और कुवैत के एक दिन के दौरे ने एक बार फिर राजनैतिक हल्क़ों का ध्यान इस ओर खींचा कि ईरान और फ़ार्स खाड़ी में उसके पड़ोसी देशों के बीच संबंध कितना अहम है।
डॉक्टर रूहानी का यह दौरा ईरान और इस्लामी देशों के बीच संबंध में विस्तार के उद्देश्य से मस्क़त से शुरु हुआ। यह दौरा ईरानी राष्ट्रपति और कुवैत के शासक की ओर से इस ताकीद के साथ संपन्न हुआ कि क्षेत्रीय देशों में सुरक्षा, स्थिरता व विकास के लिए आपस में विचार-विमर्श, सहयोग और समन्वय ज़रूरी है।
कुवैत के शासक शैख़ सबाह अहमद जाबिर अस्सबाह ने डॉक्टर रूहानी से मुलाक़ात में कहा कि क्षेत्र की मौजूदा स्थिति का तक़ाज़ा है कि हमारे बीच अच्छे संबंध हों इसलिए हम तेरहान के साथ सभी क्षेत्रों में संबंध बेहतर बनाने का संकल्प रखते हैं।
यह बयान वास्तव में ज़ायोनी शासन और क्षेत्र के कुछ देशों के बड़े पैमाने पर जारी प्रोपैगंडों का जवाब है कि जिनका लक्ष्य इस्लामी देशों के बीच फूट डालना है।
इस बात में शक नहीं कि इस दौरे पर जो बातचीत हुयी वह फ़ार्स खाड़ी के तटवर्ती देशों के लिए संबंध में विस्तार, सहयोग में वृद्धि, संयुक्त सुरक्षा क़ायम करने और आतंकवाद, हिंसा व चरमपंथ से निपटने के लिए अच्छी ख़बर है। अलबत्ता इस दौरे से उसी सीमा तक या उससे ज़्यादा क्षेत्र में शांति व सुरक्षा के दुश्मनों को निराशा हुयी। क्योंकि दुश्मनों ने जिस हद तक मुमकिन था ईरान के पड़ोसी देशों के साथ संबंध ख़राब करने की कोशिश की। इस दृष्टि से इस दौरे और इससे हासिल अवसर को अच्छा शगुन समझना चाहिए और उम्मीद करनी चाहिए कि क्षेत्र के अन्य देश इस दौरे से हासिल नतीजे को अहमियत देंगे और इसे आपस में सहयोग और क्षेत्र में मित्रता, शांति व सुरक्षा को बेहतर बनाने में उपयोग करेंगे। यह वही बिन्दु है जिस पर ओमान के शासक सुल्तान क़ाबूस ने डॉक्टर रूहानी से मुलाक़ात में बल दिया कि ईरान और क्षेत्रीय देशों के बीच अच्छे संबंध से क्षेत्र के विकास, सुरक्षा व स्थिरता में मदद मिलेगी। (MAQ/T)