वरिष्ठ नेता की दृष्टि में फ़िलिस्तीन समस्या
इस्लामी क्रांति के वरिष्ठ नेता का कहना है कि फ़िलिस्तीन का विषय मुसलमानों के बीच एकता का केन्द्र बिंदु है।
राजधानी तेहरान में मंगलवार 21 फ़रवरी को फ़िलिस्तीन के इन्तेफ़ाज़ा जनान्दोलन के समर्थन में छठी कांफ़्रेंस आरंभ हुई। इस कांफ़्रेंस में इस्लामी क्रांति के वरिष्ठ नेता आयतुल्लाहिल उज़्मा सैयद अली ख़ामेनेई ने कहा कि फ़िलिस्तीन का समर्थन सभी मुसलमानों के लिए अनिवार्य है।
इस्लामी क्रान्ति के वरिष्ठ नेता ने अपने उद्घाटन भाषण में कहा कि क्षेत्र को संकट में डालने के उद्देश्य से जिन लोगों ने अवैध ज़ायोनी शासन को अस्तित्व दिया है आज स्वयं वे भी संकटग्रस्त हैं। वरिष्ठ नेता ने कहा कि फ़िलिस्तीन की कहानी और फ़िलिस्तीनी जनता की सहनशीलता, प्रतिरोध और उनकी मज़लूमियत प्रत्येक न्यायप्रेमी और स्वतंत्रता प्रेमी इंसान को दुखी कर देती है।
निःसन्देह, फ़िलिस्तीन का विषय इस्लामी जगत के समस्त संयुक्त विषयों में अति महत्वपूर्ण विषय है। इसके महत्वपूर्ण होने के कई कारण हैं जैसे किसी राष्ट्र की भूमि का अतिग्रहण और लाखों फ़िलिस्तीनियों को अपनी ही भूमि से पलायन के लिए विवश करना। यह बात किसी भी स्थिति में अन्तर्राष्ट्रीय नियमों के अनुसार स्वीकार्य नहीं है। दूसरा कारण यह है कि फ़िलिस्तीनियों पर वास्तव में अत्याचार किये गए हैं। तीसरा प्रमुख कारण यह है कि मुसलमानों के प्रथम क़िब्ले को ध्वस्त करने के प्रयास किये जा रहे हैं। वर्तमान समय में इस्राईल, क्षेत्रीय शांति एवं सुरक्षा के लिए गंभीर ख़तरा बन चुका है जिसके कारण फ़िलिस्तीन के विषय पर अधिक से अधिक ध्यान दिये जाने की आवश्यकता है।
इस बारे में वरिष्ठ नेता ने कहा कि ज़ायोनी शासन के अस्तित्व से पैदा होने वाले ख़तरों की कदापि उपेक्षा नहीं करना चाहिए, इस लिए प्रतिरोधकर्ता मोर्चे को अपना संघर्ष जारी रखने के लिए सभी ज़रूरी संसाधनों से संपन्न किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि इस संबंध में क्षेत्र के सभी राष्ट्रों, सरकारों तथा दुनिया भर के स्वतंत्रता प्रेमियों की ज़िम्मेदारी है कि इस साहसी राष्ट्र की सारी ज़रूरतें पूरी करें। आयतुल्लाहिल उज़्मा सैयद अली ख़ामेनेई ने कहा कि इस सिलसिले में पश्चिमी तट के क्षेत्र के प्रतिरोधकर्ता मोर्चे की मूल आवश्यकताओं की ओर से भी निश्चेत नहीं रहना चाहिए जो इस समय अपने कंधे पर इंतेफ़ाज़ा आंदोलन का बोझ उठाए हुए है।
हालांकि फ़िलिस्तीनियों ने इस्राईल के मुक़ाबले में अपने अदम्य साहस और कड़े प्रतिरोध का प्रदर्शन किया है किंतु इसका यह अर्थ नहीं है कि इस्लामी जगत की इस बारे में ज़िम्मेदारी नहीं है। इन बातों के दृष्टिगत कहा जा सकता है कि वर्तमान संवदेनशील समय में यथा संभव फ़िलिस्तीन के काॅज़ को अधिक से अधिक मज़बूत किया जाए।