सऊदी अरब ने ख़रीदे अरबों डालर से हथियार
https://parstoday.ir/hi/news/iran-i42170-सऊदी_अरब_ने_ख़रीदे_अरबों_डालर_से_हथियार
सऊदी अरब के विदेशमंत्री ने अपने अमरीकी समकक्ष के साथ द्विपक्षीय वार्ता में कहा है कि ईरान की कार्यवाही को रोकने के लिए अब आगे आना होगा।
(last modified 2023-04-09T02:55:50+00:00 )
May २१, २०१७ १०:३० Asia/Kolkata

सऊदी अरब के विदेशमंत्री ने अपने अमरीकी समकक्ष के साथ द्विपक्षीय वार्ता में कहा है कि ईरान की कार्यवाही को रोकने के लिए अब आगे आना होगा।

आदिल अलजुबैर ने रेयाज़ में रेक्स टेलरसन के साथ भेंटवार्ता में ईरान के विरुद्ध निराधार दावों को पुनः दोहराया।

रेयाज़ की ओर से इस प्रकार के निराधार आरोप एेसी स्थिति में लगाए जा रहे हैं कि जब क्षेत्र में आतंकवादी गुटों के गठन में सऊदी अरब और अमरीका दोनों ही बराबर के सहभागी हैं।  वर्तमान समय में सीरिया और इराक़ में सक्रिय दाइश सहित आतंकवादी गुटों का समर्थन, अमरीका और सऊदी अरब की ओर से खुलकर किया जा रहा है।

एेसा लगता है कि इस कालखण्ड में सऊदी अरब प्रयास कर रहा है कि हथियारों के अरबों डालर के समझौते करके अमरीका के साथ अपने स्ट्रैटेजिक संबन्धों को मज़बूत करते हुए क्षेत्र में अपनी वरचस्ववादी नीति को सुरक्षित रखे ।  हालांकि अमरीका तो सऊदी अरब को दूध देने वाली गाय समझता है।  अमरीका का मानना है कि जबतक हो सके उससे दूध दुहा जाए।  यह वह बात है जिसे ट्रंप पहले भी कह चुके हैं।  सऊदी अरब की यात्रा से भी ट्रंप का उद्देश्य, इसी नीति को आगे बढ़ाना है।

सऊदी अरब के विदेशमंत्री आदिल अलजुबैर के बयान से यह बात समझी जा सकती है कि सऊदी अरब, अमरीका के साथ संबन्धों को सुधारते हुए क्षेत्र में अपनी कमज़ोर होती स्थिति को अधिक से अधिक मज़बूत करना चाहता है।  अपने इसी उद्देश्य को प्राप्त करने के लिए सऊदी अरब ने अमरीका के साथ तीन सौ अरब डालर से अधिक के हथियारों के समझौते पर हस्ताक्षर किये हैं।  सऊदी अरब का कहना है कि उसने अमरीका के साथ हथियारों के अरबों डालर के समझौते इसलिए किये हैं ताकि, उसी के कथनानुसार, आतंकवाद और उसको अस्तित्व देने वालों को सदा के लिए समाप्त कर दिया जाए।

यहां पर सवाल यह पैदा होता है कि सऊदी अरब को अरबों डालर के हथियार बेचकर क्या मध्यपूर्व की शांति एवं सुरक्षा को सुनिश्चित किया जा सकता है?  जानकारों का कहना है कि अमरीका और सऊदी अरब के दृष्टिगत हित, परस्पर आर्थिक सहयोग से नहीं बल्कि क्षेत्र में अशांति उत्पन्न करके ही प्राप्त किये जा सकते हैं जिसका स्पष्ट उदाहरण इराक़, सीरिया और यमन संकट हैं।

अमरीकी राष्ट्रपति की सऊदी अरब की यात्रा के अवसर पर ईरान के विदेशमंत्री ने विश्व में शांति के पक्षधर देशों और क्षेत्रीय एवं पड़ोसी देशों से मांग की है कि वे क्षेत्र में एक नई मानवीय त्रासदी उत्पन्न किये जाने के षडयंत्र के प्रति सचेत रहते हुए उसका डटकर प्रतरोध करें।