कुवैत का सऊदी अरब का पिछलग्गु बनने का फ़ैसला
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कुवैत का सऊदी अरब का पिछलग्गु बनने का फ़ैसला
(last modified 2023-04-09T06:25:50+00:00 )
Jul २१, २०१७ २०:३५ Asia/Kolkata

कुवैत का सऊदी अरब का पिछलग्गु बनने का फ़ैसला

 

कुवैती विदेश मंत्रालय के ‘अब्दली’ नामक मामले में ईरान के साथ कूटनैतिक संबंध का स्तर कम करने का फ़ैसला लेने के बाद, तेहरान में कुवैती दूतावास के उपप्रभारी को तेहरान की ओर से पारस्परिक कार्यवाही के अधिकार के बारे में चेतावनी देने के लिए ईरानी विदेश मंत्रालय में तलब किया गया।

ईरानी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता बहराम क़ासेमी ने कहा कि बड़े खेद की बात है कि कुवैती अधिकारी क्षेत्र की मौजूदा संवदेनशील स्थिति में तनाव को कम करने की कोशिश करने और क्षेत्र में ख़तरनाक खेल खेलने वालों व दबावों के संबंध में संयम दिखाने के बजाए, इस्लामी गणतंत्र ईरान को निराधार इल्ज़ाम का निशाना बना रहे हैं। बहराम क़ासेमी ने साफ़ तौर पर कहा कि ईरान का ‘अब्दली’ मामले से कोई संबंध नहीं है और इस मामले की जांच शुरु होने के आरंभ में ही कुवैती अधिकारियों को इस बारे में सूचित भी किया जा चुका है।

ईरान ने पड़ोसी और फ़ार्स खाड़ी के तटवर्ती देशों के साथ सहयोग व समन्वय को अपनी विदेश नीति का उसूल क़रार दिया है। जब भी क्षेत्र में कोई संकट हुआ, ईरान ने पहले कुवैत से विचार-विमर्श किया है। क़तर के साथ 4 अरब देशों के संबंध तोड़ने के मामले में भी ईरान ने किसी एक देश का पक्ष नहीं लिया बल्कि इस संकट के हल के लिए कुवैत के साथ बातचीत की।

इसके मुक़ाबले में कुछ देश हैं जो ख़तरनाक व्यवहार के ज़रिए देशों के बीच अच्छे संबंध को ख़राब करने की कोशिश करते हैं और ख़तरनाक माहौल के ज़रिए अपने व्यक्तिगत हित साधना चाहते हैं।

क़तर पर सऊदी अरब की ओर से कुछ शर्तों के ज़रिए उसकी विदेश नीति को बदलने के लिए दबाव की इसी दृष्टि से समीक्षा करनी चाहिए। क़तर पर ईरान और इख़्वानुल मुस्लेमीन से संबंध तोड़ने और दोहा में तुर्की की छावनी को बंद करने के लिए दबाव डालने के पीछे व्यक्तिगत हित हैं। सऊदी अरब क्षेत्र में ईरान के ज़िम्मेदारी भरे रोल के ख़िलाफ़ ईरानोफ़ोबिया की नीति अपनाए हुए है और इस मार्ग में झूठे इल्ज़ाम सहित विभिन्न तरीक़ों से दूसरे देशों को अपने साथ करने की कोशिश कर रहा है।

कुवैत का हालिया फ़ैसला दरअस्ल सऊदी अरब के इशारे पर है। यही वह चीज़ है जिसे क़तर ने अब तक क़ुबूल नहीं किया क्योंकि क़तर अपनी विदेश नीति को सऊदी अरब के हाथों बंधुआ नहीं बनाना चाहता। (MAQ/T)