कूटनीति में क्रांतिकारी और धार्मिक भावनाओं की सुरक्षा ज़रूरीः वरिष्ठ नेता
इस्लामी क्रांति के वरिष्ठ नेता ने कहा है कि कूटनीति में धार्मिक तथा क्रांतिकारी भावनाओं को सुरक्षित रखना ज़रूरी है।
आयतुल्लाहिल उज़्मा सैयद अली ख़ामेनेई ने शनिवार को तेहरान में राष्ट्रपति डा. हसन रूहानी और नए मंत्रिमण्डल के सदस्यों से भेंट की।इस भेंटवार्ता में वरिष्ठ नेता ने कहा कि डिप्लोमैसी में होशियार रहने के साथ ही साथ अपडेट भी रहना चाहिए। उन्होंने कहा कि डिप्लोमैसी के क्षेत्र में अपनी क्रांति और राष्ट्रीय उपलब्धियों पर गौरव करना चाहिए जैसे वर्चस्ववाद से मुक़ाबला, अत्याचार का विरोध और विस्तारवादियों से घृणा आदि। वरिष्ठ नेता ने कहा कि क्रांतिकारी नियमों के प्रति कटिबद्धता, सम्मान का कारण बनेगी।
आयतुल्लाहिल उज़्मा सैयद अली ख़ामेनेई ने कहा कि डिप्लोमैसी या कूटनीति में कुछ गिनेचुने देशों को दृष्टिगत न रखकर पूरे विश्व के देशों को नज़र में रखा जाए। उन्होंने अर्थव्यवस्था को देश की वास्तविक प्राथमिकता बताया। वरिष्ठ नेता ने कहा कि देश के अधिकारियों को जनता की आर्थिक समस्याओं के समाधान के लिए सतत प्रयासरत रहना चाहिए। उन्होंने कहा कि देश की अर्थव्यवस्था को तेल पर निर्भर नहीं होना चाहिए। उनका कहना था कि ईरान के भीतर पाई जाने वाली संभावनाओं, क्षमताओं और श्रमबल के दृष्टिगत यह काम संभव है।
इस्लामी क्रांति के वरिष्ठ नेता ने देश के राष्ट्रपति और नए मंत्रिमण्डल को संबोधित करते हुए कुछ अहम सिफ़ारिशें कीं।