ट्रम्प सरकार और परमाणु समझौते के उल्लंघन के चिन्ह
अमरीका के राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रम्प की सरकार, ईरान के साथ होने वाले परमाणु समझौते को कमज़ोर करने की हर संभव कोशिश कर रही है और हर कुछ समय बाद अमरीका की ओर से इस समझौते के उल्लंघन के चिन्ह दिखाई देते हैं। ईरान को व्यापारिक विमानों की बिक्री पर रोक, अमरीका की ओर से जेसीपीओए के उल्लंघन की ताज़ा निशानी है।
अमरीकी प्रतिनिधि सभा ने बुधवार को उस प्रस्ताव को मंज़ूरी दे दी जिसमें ईरान को व्यापारिक विमान बेचने पर प्रतिबंध की मांग की गई थी। परमाणु समझौते का उल्लंघन करने वाले इस क़दम के लिए यह बहाना बनाया गया है कि ईरान व्यापारिक विमानों को सीरिया में बल और हथियार भेजने के लिए इस्तेमाल कर रहा है। इस प्रकार के दावे और बहाने, परमाणु समझौते को कमज़ोर बनाने के लिए ट्रम्प सरकार और सेनेट व कांग्रेस में उसके समर्थकों के हथकंडे हैं। स्पष्ट सी बात है कि परमाणु समझौता एक बहुपक्षीय समझौता है और दो देशों के बीच नहीं हुआ है कि कोई सरकार आसानी से उसे तोड़ दे या उस पर पुनर्विचार करे।
संयुक्त समग्र कार्य योजना (जेसीपीओए) के अनुसार परमाणु समझौते के सभी पक्षों को परस्पर व्यवहार के आधार पर सद्भावना साथ और सार्थक वातावरण में एक दूसरे के सम्मान के साथ इस समझौते को क्रियान्वित करना चाहिए लेकिन अमरीका अपनी इन कटिबद्धताओं की अनदेखी करते हुए जेसीपीओए के अंतर्गत ईरान के हितों को न्यूनतम स्तर पर पहुंचाना चाहता है। जब अमरीकी सरकार परमाणु समझौते पर पुनर्विचार के लिए वार्ता के संबंध में अपने आपको विश्व समुदाय से अलग थलग देखती है तो उसके पास अकेले ही इस समझौते के उल्लंघन के अलावा कोई मार्ग नहीं बचता।
बहरहाल अमरीकी सरकार ने परमाणु समझौते के साथ जो खेल शुरू किया है उसमें उसे हर स्थिति में पराजय का ही सामना करना पड़ेगा क्योंकि जेसीपीओए के निरंतर उल्लंघन ने दुनिया पर यह बात सिद्ध कर दी है कि अमरीका भरोसे के लायक़ नहीं है और अपनी अंतर्राष्ट्रीय कटिबद्धताओं का पालन नहीं करता। इसके अलावा जेसीपीओए के मामले में अमरीका अलग थलग पड़ चुका है और उसकी ओर से परमाणु समझौते के निरंतर उल्लंघन को इसी परिप्रेक्ष्य में देखना चाहिए। अमरीका को छोड़ कर गुट पांच धन एक के सभी सदस्य देश परमाणु समझौते के क्रियान्वयन पर बल देते हैं। जेसीपीओए के ख़िलाफ़ अमरीका का हर क़दम उसे अधिक अलग थलग कर देगा क्योंकि विश्व व्यवस्था का वातावरण अब पहले जैसा नहीं है कि अमरीका के झूठे दावों से इस्लामी गणतंत्र ईरान के ख़िलाफ़ आम सहमति बन जाए। (HN)