परमाणु समझौते के बारे में फ़ैसले से पहले ट्रम्प के दावे
अमरीका के राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रम्प ने, जो हर बहाने से ईरान के साथ हुए परमाणु समझौते को कमज़ोर बनाने की कोशिश करते रहते हैं, एक बार फिर दावा किया है कि इस्लामी गणतंत्र ईरान ने परमाणु समझौते की भावना का पालन नहीं किया है।
ट्रम्प ने वाइट हाउस में अमरीका के सैन्य कमांडरों से मुलाक़ात में कहा कि वे जल्द ही अपने इस बारे में फ़ैसले की घोषणा कर देंगे कि वे परमाणु समझौते (जेसीपीओए) की पुष्टि करेंगे या नहीं। अमरीकी राष्ट्रपति ने दावा किया कि हम ईरान को परमाणु हथियार बनाने की अनुमति नहीं देंगे। इसके बाद ट्रम्प ने आतंकी गुटों को अस्तित्व प्रदान करने और क्षेत्र में आतंकवाद का समर्थकों का साथ देने में अमरीका की गुप्तचर सेवाओं के क्रियाकलाप की अनदेखी करते हुए दावा किया कि ईरान आतंकवाद का समर्थन कर रहा है और मध्यपूर्व के क्षेत्र में हिंसा, जनसंघर और अराजकता निर्यात कर रहा है अतः परमाणु मामले में ईरान की आकांक्षाओं पर अंकुश लगाया जाना चाहिए।

अमरीकी राष्ट्रपति का ईरान विरोधी रुख़, सच्चाई से पूरी तरह दूर होने के अलावा यह भी दर्शाता है कि वे क्षेत्र के एक शक्तिशाली व प्रभावी देश के रूप में ईरान की भूमिका से ज़ायोन शासन की तरह ही खिन्न हैं। ट्रम्प का यह बयान और इसी तरह संयुक्त राष्ट्र संघ की महासभा में दिया गया उनका इसी तरह का बयान, अमरीका की शक्ति को नहीं दर्शाता बल्कि यह ईरान की शक्ति के सामने उसकी बदहवासी का चिन्ह है। परमाणु समझौते के बारे में फ़ैसला करने संबंधी बयान से ट्रम्प ने सांकेतिक रूप से यह कहना चाहा है कि ईरान जेसीपीओए का पालन नहीं कर रहा है और वे 15 अक्तूबर को अमरीकी कांग्रेस में इसकी पुष्टि नहीं करेंगे जबकि अंतर्राष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी ने अपनी सभी रिपोर्टों में इस बात की पुष्टि की है कि ईरान ने परमाणु समझौते का पूरी तरह से पालन किया है।
वास्तव में अमरीका के राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रम्प जिस चीज़ के इच्छुक हैं वह परमाणु समझौते में परिवर्तन और उसके बारे में फिर से वार्ता शुरू करना है ताकि ईरान पर अधिक प्रतिबंध लगाए जा सकें लेकिन परमाणु समझौता एक बहुपक्षीय समझौता है और इसके अन्य पक्ष स्पष्ट रूप से कह चुके हैं कि इसके बारे में पुनः वार्ता संभव नहीं है। (HN)