देशों और अंतरराष्ट्रीय संगठनों ने ट्रम्प को चेतावनी दी है
कुछ गुटों ने परमाणु समझौते को खत्म करने को आग से खिलवाड़ की संज्ञा दी है।
ईरान और परमाणु समझौते के संबंध में अमेरिकी सरकार के दृष्टिकोण की घोषणा का समय जैसे जैसे निकट आता जा रहा है अमेरिका द्वारा परमाणु समझौते के प्रति कटिबद्ध रहने के संदर्भ में विचार- विमर्श तेज़ हो गया है।
संचार माध्यमों ने घोषणा की है कि अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प संभवतः 12 अक्तूबर के अपने भाषण में व्यापक रूप से ईरान के संबंध में वाशिंग्टन की नीति की घोषणा करेंगे।
संभावित रूप से अमेरिका के परमाणु समझौते से निकल जाने पर विस्तृत पैमाने पर आपत्ति जताई जा रही है। हालिया दिनों में विश्व के प्रभावी व महत्वपूर्ण समस्त देशों और अंतरराष्ट्रीय संगठनों व संस्थाओं ने परमाणु समझौते को ख़तरे में डालने के संबंध में ट्रम्प को चेतावनी दी है जबकि कुछ ने इस प्रकार के प्रयास को जंगल के कानून की संज्ञा दी है।
इसी प्रकार कुछ गुटों ने परमाणु समझौते को खत्म करने को आग से खिलवाड़ की संज्ञा दी है।
अमेरिका जैसा देश एक समय में दूसरे देशों के साथ मिलकर परमाणु समझौता करता है और जब अमेरिका में सरकार बदल जाती है तो वह इस समझौते से भिन्न रवइया अपनाता है और अगर वह सामूहिक समझौते से बाहर निकल जाता है तो इससे विश्व समुदाय को खतरनाक संदेश जायेगा।
अगर अमेरिका एसा करता है तो विश्व में कोई भी पक्ष यहां तक कि वाशिंग्टन के घटक भी अमेरिकी सरकार पर विश्वास नहीं करेंगे और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहले से अधिक अविश्वास प्रचलित होगा।
रोचक बात यह है कि परमाणु समझौते का एक पक्ष ईरान है और वह परमाणु समझौते के प्रति कटिबद्ध रहा है और इस बात की पुष्टि परमाणु ऊर्जा की अंतरराष्ट्रीय एजेन्सी IAEA ने भी अपनी आठ बार की रिपोर्टों में भी की है।
बहरहाल अगर अमेरिका परमाणु समझौते से निकलता है तो जिन देशों ने ईरान के साथ अरबों डालर के समझौते किये हैं वे खतरे में पड़ जायेंगे और अमेरिका का यह कार्य केवल ईरान के विरुद्ध नहीं होगा बल्कि वह वाशिंग्टन की ओर से अंतरराष्ट्रीय समुदाय के विरुद्ध एक प्रकार के युद्ध की घोषणा होगा। MM