जेसीपीओए, अमरीकी साख का मानदंड
राष्ट्रपति हसन रूहानी ने कहा है कि जेसीपीओए, परमाणु वार्ता में भाग लेने वाले देशों के साथ ही साथ विश्व की सभी सरकारों के लिए परीक्षा है।
राष्ट्रपति रूहानी ने कहा कि विश्व की किसी भी सरकार की अन्तर्राष्ट्रीय साख का मानदंड, उसके द्वारा दिये गए वचनों का पालन करना है।
ईरान के राष्ट्रपति ने जेसीपीओए के बारे में अमरीकी राष्ट्रपति के निर्णय लेने से पहले बुधवार को तेहरान में कहा कि वार्ता में भाग लेने वाले अगर अपने वचनों के प्रति अडिग रहें तो यह इस अर्थ में है कि उन्होंने अपनी साख की सुरक्षा की है। उन्होंने कहा कि एेसा न करने की स्थिति में उस देश की साख ख़राब होगी जो वचन तोड़ेगा। जनवरी 2016 को जेसीपीओए के लागू होने के समय से जिसने इसके लागू होने को सुनिश्चित किया वह, वार्ता में भाग लेने वाले देशों की कटिबद्धता थी। किसी भी देश या सरकार की साख का आधार अन्तर्राष्ट्रीय समझौतों के प्रति उसकी वचनबद्धता है। जो भी देश एेसा नहीं करता वह वास्तव में अपनी साख को ख़राब करता है।
जेसीपीओए के लागू हुए लगभग दो वर्ष होने को आ रहे हैं किंतु इस बारे में अमरीका के क्रियाकलाप सदैव ही संदिग्ध रहे हैं जिसके कारण उसकी अविश्वसनीयता बढ़ी है। अमरीका की वर्तमान सरकार की गतिविधियां यह सिद्ध करती हैं कि अमरीका, न केवल ईरान के लिए बल्कि पूरे विश्व के लिए भरोसे योग्य देश नहीं है। इस बारे में यूरोपीय संघ की विदेश नीति प्रभारी मोग्रीनी ने कहा है कि जेसीपीओए से अमरीका के निकलने की स्थिति में विश्व स्तर पर यह संदेश जाएगा कि संयुक्त राज्य अमरीका, भरोसे योग्य देश नहीं है। इसी बारे में एक अमरीकी सेनेटर सेनडर्ज़ ने कहा कि ट्रम्प की ओर से जेसीपीओए की पुष्टि न करने से अमरीका, विश्व में अलग-थलग पड़ जाएगा।
ईरान के राष्ट्रपति रूहानी का कहना है कि ईरानी जनता, अमरीका पर भरोसा नहीं करती और यह बात अधिक स्पष्ट हो चुकी है। उन्होंने कहा कि जेसीपीओए की विफलता की स्थिति में ईरान के हितों को आगे बढ़ाने के मार्ग में कोई बाधा नहीं आएगी।