जेसीपीओए और डोनल्ड ट्रम्प की नीतियां
अब्बास इराक़ची ने कहा है कि जेसीपीओए के बारे में अमरीकी राष्ट्रपति के क्रियाकलाप, एक अन्तर्राष्ट्रीय समझौते को नुक़सान पहुंचाने के उद्देश्य से हैं।
ईरान के विदेश उपमंत्री अब्बास इराक़ची ने कहा कि परमाणु समझौते के बारे में ट्रम्प का व्यवहार अस्वीकार्य है। उन्होंने अमरीका की ओर परमाणु समझौते के हनन के कुछ अवसरों का उल्लेख करते हुए बताया कि जेसीपीओए के 26वें, 27वें और 28वें अनुच्छेद के अनुसार अमरीका ने वचन दिया है कि वह समझौते को सार्थक वातावरण में पूरी सदभावना के साथ लागू करेगा किंतु वाशिंग्टन ने अभी तक इन अनुच्छेदों का पालन नहीं किया है। उनका कहना था कि कई असवरों पर अमरीका ने जेसीपीओए का हनन किया है।
अमरीका की ओर से परमाणु समझौते का हनन एेसा काम है जिसने विश्व समुदाय के लिए गंभीर चुनौतियां उत्पन्न कर दी हैं जिनमें से एक, अन्तर्राष्ट्रीय स्तर पर वचनों का पालन नहीं करना है। इस काम से पूरे विश्व को क्षति पहुंचेगी। परमाणु समझौता हो जाने के बाद विश्व स्तर पर बनने वाल सौहार्दपूर्ण वातावरण को दूषित करने के उद्देश्य से अमरीकी राष्ट्रपति, पहली बार अपनी मध्यपूर्व यात्रा पर पहुंचे। रेयाज़ में एक संवाददाता सम्मेलन में ट्रम्प ने यह प्रयास किया कि ईरान को क्षेत्रीय संकट में फंसाया जाए। अमरीका के एक अध्धयन केन्द्र ने अपनी रिपोर्ट में लिखा है कि ईरान के संदर्भ में अमरीका की नई रणनीति यह है कि क्षेत्र में अधिक से अधिक प्रभाव बढ़ाया जाए
अमरीका ने परमाणु समझौते जेसीपीओए की छवि ख़राब करने के लिए ईरान की इस्लामी शासन व्यवस्था को लक्ष्य बनाया है। इसके अन्तर्गत वह विश्व स्तर पर ईरान की वास्तविक छवि को ख़राब करने में लगा हुआ है। इसी नीति के अन्तर्गत ईरान की मिज़ाइल क्षमता को क्षेत्र के लिए ख़तरा बनाकर पेश किया जा रहा है। इसी के साथ आतंकवादी गुटों विशेषकर दाइश से संघर्ष और अवैध ज़ायोनी शासन के मुक़ाबले में फ़िलिस्तीनियों के समर्थन को आंतरिक मामलों में हस्तक्षेप के रूप में दर्शाया जा रहा है।