सऊदी स्पांरसरशिप में अमरीकी प्रौपैगंडाः अलक़ायदा से हैं ईरान के संबंध!!
अमरीकी ख़ुफ़िया एजेंसी तथा Foundation for Defense of Democracies एफ़डीडी, पाकिस्तान के शहर एबटाबाद में अलक़ायदा सरग़ना ओसामा बिन लादेन के ठिकाने पर वर्ष 2011 में किए गए आप्रेशन के जो दस्तावेज़ जारी किए हैं उनके माध्यम से यह दिखाने का प्रयास किया गया है कि अलक़ायदा के संबंध ईरान से हैं।
ईरान के विदेश मंत्री मुहम्मद जवाद ज़रीफ़ ने गुरुवार को इन झूठे दस्तावेज़ों पर प्रतिक्रिया जताते हुए गुरुवार को कहा कि पेट्रोडालर के प्रभाव में सीआईए और एफ़डीडी की झूठी रिपोर्ट अलक़ायदा को ईरान से जोड़ने की कोशिश 11 सितम्बर के आतंकी हमलों में अमरीका के घटकों की भूमिका को मिटा नहीं सकती।
दूसरी ओर लंदन में ईरान के राजदूत हमीद बईदीनेजाद ने भी इस दस्तावेज़ पर अपनी प्रतिक्रिया में अमरीका की पूर्व विदेश मंत्री हिलैरी क्लिंटन की एक वीडिया क्लिप शेयर की जिसमें वह साफ़ साफ़ कह रही हैं कि हमने अलक़ायदा का गठन किया, आधुनिक हथियारों से उनकी मदद की और अफ़ग़ानिस्तान और पाकिस्तान में एक बड़ी अराजकता छोड़कर हम हट गए।
हालांकि मई 2011 के अमरीकी आप्रेशन में अलक़ायदा सरग़ना ओसामा बिन लादेन के मारे जाने के कारण यह बात राज़ ही रह गई कि अलक़ायदा का गठन कैसे हुआ और अमरीका ने अफ़ग़ानिस्तान में अपने हित साधने के लिए अलक़ायदा का किस तरह प्रयोग किया लेकिन जो दस्तावेज़ बाक़ी बचे हैं और हिलैरी क्लिंटन का जो इक़बालिया बयान है उससे साफ़ ज़ाहिर है कि अलक़ायदा से अमरीका और उसके घटकों का सीधा संबंध है। अमरीका में होने वाली 11 सितम्बर की घटना पर अगर नज़र डाली जाए तो पता चलेगा कि हमलावरों का संबंध सऊदी अरब से था। 11 सितम्बर की घटना अंजाम देने वाले 19 हमलावरों में से 15 सऊदी नागरिक थे जिनका संबंध अलक़ायदा से था।
सऊदी अरब आतंकवाद की जन्मस्थली के रूप में इस अभिषाप के प्रसार में बड़ी बुनियादी भूमिका निभा रहा है। इस बीच दूसरे देशों को आरोपी ठहराने के लिए अमरीका का कट एंड पेस्ट के तरीक़े से दस्तावेज़ों को पेश करना यह बताता है कि सऊदी अरब के पेट्रोडालर का अमरीकी नीति निर्धारण प्रक्रिया में ख़ासा असर है। सऊदी अरब अपने अनुभवहीन नए शासकों की अगुवाई में पेट्रोडालर की मदद से अपनी छवि सुधारने के प्रयास में है। अलक़ायदा, दाइश और अन्नुस्रा फ़्रंट की मूल विचारधारा वहाबियत है और वहाबियत का केन्द्र सऊदी अरब है। काट छांट करके दस्तावेज़ों को प्रकाशित करने से इन तथ्यों को बदला नहीं जा सकता।
सऊदी अरब के क्राउन प्रिंस मुहम्मद बन सलमान ने हाल ही में रियाज़ में आर्थिक फ़ोरम को संबोधित करते हुए कहा कि उनका देश मध्यमार्गी इस्लाम की ओर पलटने की प्रक्रिया से गुज़र रहा है, यह भी दुनिया भर में ख़राब हो चुकी सऊदी अरब को सुधारने का प्रयास है। मुहम्मद बिन सलमान इससे पहले मान चुके हैं कि उनका देश चरमपंथ की उच्च शिक्षा दे रहा है।
बहरहाल अपनी छवि सुधारने और दूसरों पर छींटा कशी करने में सऊदी अरब को अमरीका की कुछ संस्थाओं की मदद मिल रही है लेकिन इन प्रयासों से इतिहास को बदला नहीं जा सकता। अमरीका का बहुत क़रीबी घटक सऊदी अरब ही 11 सिम्बर की घटनाओं का मुख्य आरोपी है।