दाइश अमेरिकी हथकंडा हैः ईरान के पूर्व विदेशमंत्री
ईरान के पूर्व विदेशमंत्री मनूचेहर मुत्तकी ने परमाणु समझौते से निकलने के संबंध में अमेरिकी खतरे की ओर संकेत करते हुए कहा है कि अमेरिका की स्ट्रैटेजी परमाणु समझौते के अनुच्छेदों को आघात पहुंचाना और साथ ही उसे सुरक्षित रखना है।
मनूचेहर मुत्तकी ने रशा टूडे के साथ वार्ता में कहा कि अमेरिका ने परमाणु समझौते के बहुत से अनुच्छों का पालन नहीं किया है। उन्होंने कहा कि अमेरिका इस समय परमाणु समझौते के संबंध में दोबारा वार्ता करना और उन बातों को पेश करना चाहता है जिनका संबंध इस समझौते से नहीं है।
मनूचेहर मुत्तकी से जब यह पूछा गया कि किस समय ईरान समझेगा कि परमाणु समझौता समाप्त हो गया है और वह अपनी परमाणु गतिविधियों को नये सिरे से आरंभ कर देगा तो उन्होंने कहा कि अगर समस्त पक्ष परमाणु समझौते से निकल जायें तो इसका मतलब यह होगा कि परमाणु समझौता समाप्त हो गया है और इस समय अमेरिकियों ने इस प्रकार का रवइया अपना रखा है।
ईरान के पूर्व विदेशमंत्री ने तेहरान के विरुद्ध अमेरिका के नये प्रतिबंधों के बारे में कहा कि अमेरिकी प्रतिबंधों का इस्लामी गणतंत्र ईरान के लिए कोई महत्व नहीं है और जो चीज़ तेहरान के लिए महत्वपूर्ण है वह इन प्रतिबंधों के प्रति गुट पांच धन एक के अन्य सदस्य देशों की प्रतिक्रिया है।
उन्होंने इसी प्रकार यमन पर सऊदी अरब के पाश्विक हमलों की ओर संकेत किया और कहा कि कुछ देश यमन पर सऊदी अरब के हमले के लिए प्रोत्साहन का कारण बने और उन देशों ने मध्यस्थ बनने, युद्ध बंद करवाने और स्थिति को शांत करवाने के बजाये युद्ध की आग भड़काई।
ईरान के विदेशमंत्री ने आतंकवादी गुट दाइश से मुकाबले में प्रतिरोध की विजय की ओर संकेत किया और कहा कि यह बड़ी सफलता क्षेत्र के देशों के मध्य विश्वास व भरोसा उत्पन्न होने का कारण बनी है।
उन्होंने कहा कि दाइश संकट की जड़ था और ईरान का ध्यान संकट की जड़ को खत्म करने पर था। साथ ही उन्होंने कहा कि दाइश अमेरिका और जायोनी शासन का हथकंडा है और तेल का उत्पादन करने वाले क्षेत्र के कुछ देश उसका वित्तीय समर्थन कर रहे थे ताकि क्षेत्र को असुरक्षित कर सकें। MM