अमरीकी मीडिया को ट्रम्प शैख़ चिल्ली लगने लगे हैं!
ईरान के कई शहरों में पिछले तीन दिनों के दौरान विरोध प्रदर्शन हुए जिसमें सरकार से आम नागरिकों की ख़राब आर्थिक दशा को बेहतर बनाने और बेरोज़गारी का अंत करने की मांग की गई।
अमरीकी राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रम्प यह देखते ही हरकत में आ गए और टिप्पणी की कि महंगाई, बेरोज़गारी और ग़रीबी से परेशान ईरानी नागरिकों ने प्रदर्शन किए। ट्रम्प ने शनिवार की सुबह ट्वीट किया कि ईरानी सरकार की ज़िम्मेदारी है कि अपनी जनता के अधिकारों का सम्मान करे इसमें अभिव्यक्ति का अधिकार भी शामिल है, सारी दुनिया ईरान को देख रही है।
ईरान में होने वाले प्रदर्शनों के बारे में ट्रम्प ने जो रुख़ अपनाया इस पर अमरीकी मीडिया में प्रतिक्रिया देखने में आई।
न्यूयार्क टाइम्ज़ ने एक लेख प्रकाशित किया जिसमें अमरीकी राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रम्प को नसीहत की गई है कि ईरान में हो रहे प्रदर्शनों के मामले में हस्तक्षेप न करें बल्कि ख़ामोशी से हालात को देखें। पत्र ने लिखा कि ट्रम्प ने ईरान के प्रदर्शनों के बारे में जो ट्वीट किए वह अनावश्यक थे। क्योंकि इन प्रदर्शनों के बारे में अभी कुछ पता नहीं है कि क्यों हो रहे हैं और कैसे समाप्त होंगे लेकिन इतना तो तय है कि अमरीकी अधिकारियों की ओर से इन प्रदर्शनों के समर्थन का कोई फ़ायदा नहीं होगा बल्कि उल्टा उसर पड़ेगा।
न्यूयार्क टाइम्ज़ ने आगे लिखा कि ईरान की जनता अपनी सरकार की कुछ नीतियों से अप्रसन्न है लेकिन यह जनता हरगिज़ नहीं चाहती कि अमरीका का राष्ट्रपति जिसने ईरान पर लगे प्रतिबंधों में ढील दिए जाने का विरोध किया था, जिसने ईरानियों के अमरीका में प्रवेश पर रोक लगाई है वह ईरानी जनता के प्रदर्शनों के मामले में कोई भी हस्तक्षेप करे।
वरिष्ठ पत्रकार स्टीफ़न एयर्लनर ने एक डिबेट में कहा कि राष्ट्रपति ट्रम्प के बारे में बहुत सी अटकलें लगाई जा रही हैं। मैं यह कहना चाहता हूं कि मध्यपूर्व के बारे में ट्रम्प की नीति अस्थिर और डावांडोल है।
अमरीका से बाहर भी मीडिया का रुख़ यह है कि पश्चिम के हस्तक्षेप के उलटे परिणाम निकलेंगे।
गार्डियन अख़बार ने अपने एक लेख में लिखा है कि ईरान के विरोधी, मरुस्थल के आसमान में चकराते घायल पक्षियों की तरह जो नीचे उतरने के लिए किसी डाल की तलाश में रहते हैं, ईरान में हो रहे प्रदर्शनों को उम्मीद भरी नज़र से देख रहे हैं।
ईरान में होने वाले प्रदर्शन कुछ सामान्य कारणों से हो रहे हैं यदि पश्चिमी सरकारें या अरब सरकारें यह उम्मीद लगा रही हैं कि इन प्रदर्शनों का मतलब इस्लामी व्यवस्था से जनता का मुंह फेर लेना है तो यह उनकी भूल और मूर्खता है। दुनिया के अन्य देशों की तरह ईरान में लोग बहुत सी चीज़ों पर आपत्ति करते हैं और विरोध प्रदर्शन भी करते हैं। ईरानी सरकार के विरोधियों को चाहिए कि इन प्रदर्शनों से आस न लगाएं।