परमाणु समझौते के भविष्य के बारे मे ब्रसल्ज़ में विचार-विमर्श
ईरान के विदेशमंत्री, परमाणु समझौते पर विचार-विमर्श के उद्देश्य से ब्रसल्ज़ में है जहां पर वे ब्रिटेन, फ़्रांस और जर्मनी के विदेशमंत्रियों सहित यूरोपीय संघ की विदेश मामलों की प्रभारी से भेंटवार्ताएं करेंगे।
मुहममद जवाद ज़रीफ़, परमाणु समझौते या जेसीपीओए के बारे में ब्रसल्ज़ में वार्ता करने से पहले माॅस्को गए थे। जेसीपीओए के बारे में ईरान के विदेशमंत्री और यूरोपीय अधिकारियों के बीच वार्ता एेसी स्थिति में हो रही है कि जब अमरीकी राष्ट्रपति ट्रम्प, शुक्रवार को परमाणु समझौते के बारे में कोई फैसला लेंगे। अमरीका की सत्ता संभालने के बाद से ट्रम्प, अपने विचारों के अनुसार जेसीपीओए के उल्लंघन के कारण ईरान पर परमाणु मामले में प्रतिबंधों के बढ़ाने के प्रयास में रहे हैं।
यहां पर इस बात का उल्लेख ज़रूरी है कि जेसीपीओए के बारे में क़ानूनी ढंग से निर्णय लेने का अधिकार केवल आईएईए या अन्तर्राष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेन्सी को है। यह अन्तर्राष्ट्रीय संस्था, जेसीपीओए के लागू होने के समय से लेकर अबतक कम से कम 9 बार इस बात की पुष्टि कर चुकी है कि ईरान, परमाणु समझौते के प्रति पूरी तरह से कटिबद्ध रहा है। अमरीकी क़ानून के अनुसार इस देश का राष्ट्रपति परमाणु समझौते के बारे में अपनी रिपोर्ट कांग्रेस को देने के लिए बाध्य है। परमाणु समझौते के संदर्भ में अमरीका के " INARA" क़ानून के आधार पर इस देश के राष्ट्रपति को चाहिए कि वह हर 90 दिन में एक बार इस बारे में अपनी रिपोर्ट पेश करे। इस बारे में ट्रम्प की नीति फ़िलहाल अस्पष्ट है।
परमाुण समझौते के भविष्य के बारे में अलग-अगल ढंग से अटकलें लगाई जा रही हैं। कुछ लोगों का कहना है कि ट्रम्प एक पक्षीय रूप से परमाणु समझौते से निकल सकते हैं जिसका विश्व समुदाय प्रबल विरोधी है। एक बात यह भी कही जा रही है कि ईरान की ओर से जेसीपीओए के प्रति कटिबद्ध रहने पर आधारित आईएईए की रिपोर्टों के कारण अमरीकी राष्ट्रपति प्रतिबंधों को हटाना चाहेंगे लेकिन ईरान के विरुद्ध दबाव बनाए रखेंगे। इसी बीच एसोसिएटेड प्रेस ने वाइट हाउस के एक विश्वस्त सूत्र के हवाले से लिखा है कि यह माना जा रहा है कि ट्रम्प शुक्रवार को ईरान के विरुद्ध आर्थिक प्रतिबंधों को बढ़ा देंगे। परमाणु समझौते के बारे में अपनी यात्रा आरंभ करने से पहले ईरान के विदेशमंत्री ने कहा था कि विश्व समुदाय ने स्पष्ट रूप में यह दिखा दिया है कि वह अमरीकी नीतियों का समर्थन नहीं करेगा क्योंकि उसकी नीतियां, विध्वंसक हैं।