सऊदी अरब सुधर जाए और बुद्धि से काम लेः राष्ट्रपति
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इस्लामी गणतंत्र ईरान के राष्ट्रपति डाक्टर हसन रूहानी ने ईरान पर अमरीकी दबाव को प्रभावहीन और इस क्षेत्र में अपनी मानवता विरोधी कार्यवाही में उसे विफल बताया, इसी के साथ सऊदी अरब को उन्होंने सलाह दी है कि बुद्धि से काम ले और वर्तमान विध्वंसकारी शैली छोड़ दे।
(last modified 2023-04-09T02:55:50+00:00 )
Feb ०६, २०१८ १८:४८ Asia/Kolkata
  • सऊदी अरब सुधर जाए और बुद्धि से काम लेः राष्ट्रपति

इस्लामी गणतंत्र ईरान के राष्ट्रपति डाक्टर हसन रूहानी ने ईरान पर अमरीकी दबाव को प्रभावहीन और इस क्षेत्र में अपनी मानवता विरोधी कार्यवाही में उसे विफल बताया, इसी के साथ सऊदी अरब को उन्होंने सलाह दी है कि बुद्धि से काम ले और वर्तमान विध्वंसकारी शैली छोड़ दे।

राष्ट्रपति डाक्टर हसन रूहानी ने मंगलवार को तेहरान में एक बड़े पत्रकार सम्मेलन के दौरान ब्रिटेन के एक पत्रकार के सवाल के जवाब में कहा कि ईरान पर अमरीकी दबाव प्रभावहीन है।

उन्होंने कहा कि एेसा कदापि नहीं है कि अमरीका, ईरान पर दबाव डालने का फ़ैसला कर लेगा तो ईरान पर दबाव पड़ जाएगा। उन्होंने कहा कि अमरीका ने ईरान की सरकार और जनता के लिए समस्या खड़ी करने के हमेशा प्रयास किए हैं।

डाक्टर हसन रूहानी ने कहा कि ईरान के विरुद्ध अमरीका के प्रयास पिछली अमरीकी सरकार के काल में भी जारी रहे किन्तु वर्तमान अमरीकी सरकार ईरान को नुक़सान पहुंचाने का पूरा प्रयास कर रही है।

उन्होंने कहा कि यह पहला अवसर है कि अमरीकी राष्ट्रपति ने ईरान के विरुद्ध अपनी विध्वंसकारी योजना पर अमल के लिए सुरक्षा परिषद के सदस्य देशों के राजदूतों को लंच पर बुलाया।

राष्ट्रपति रूहानी ने अमरीका की विफलताओं का उल्लेख करते हुए कहा कि क्षेत्र की स्थिति हमारी दृष्टिगत शैली पर जा रही है। डाक्टर हसन रूहानी ने कहा कि अमरीका आतंकवादियों को बचाना चाहता था और हम उनकी पराजय चाहते थे।  उन्होंने कहा कि अमरीका, इराक़ और सीरिया में आतंकवादियों को बाक़ी रखने में विफल रहा और हम उन्हें ख़त्म करने और पराजित करने में विफल रहे। 

उन्होंने कहा कि अमरीका ने सीरिया के लिए एक और विध्वंसकारी योजना तैयार की है किन्तु उसको कदापि सफलता नहीं मिलेगी। राष्ट्रपति रूहानी ने कहा कि परमाणु समझौते पर दोबारा वार्ता या उसको दोबारा तैयार करना संभव नहीं है।

उन्होंने कहा कि यह एक एेसा समझौता है जो तीस महीने के प्रयासों के बाद लिखा गया, उस पर समस्त पक्षों ने हस्ताक्षर किए हैं और संयुक्त राष्ट्र संघ की सुरक्षा परिषद ने भी उसकी पुष्टि कर दी है और अब कोई वजह नहीं बनती कि परमाणु समझौते के बारे में दोबारा वार्ता की जाए।

उन्होंने कहा कि रक्षा संसाधन के बारे में हमें जिस चीज़ की भी आवश्यकता होगी हम उसे महत्व देंगे और इस संबंध में किसी से वा्रता नहीं करेंगे। डाक्टर हसन रूहानी ने इस प्रकार क्षेत्र में सऊदी अरब की सरकार की कार्यवाहियों के बारे में भी कहा कि वर्तमान सऊदी शासक एक दिन इस बात को समझ लेंगे कि जिस रास्ते का उन्होंने चयन किया वह सहीं नहीं है और इससे उनको कोई परिणाम हासिल नहीं होगा जैसा कि इराक़ और सीरिया पर दाइश आतंकवादी गुट को थोपने की उनकी कार्यवाही परिणामहीन रही।

राष्ट्रपति डाक्टर हसन रूहानी ने कहा कि सऊदी अधिकारियों ने यमन पर क़ब्ज़ा करने का प्रयास किया और इतनी बमबारी और तबाही व बर्बादी के बाद देंखे कि वह कहां पहुंचे? उन्होंने कहा कि हम चाहते हैं कि सऊदी अधिकारी सुधर जाएं और सही रास्ते पर आ जाएं, अपने देश की जनता और मुसलमानों के हितों पर ध्यान दें और इस संबंध में यदि उसे हमारी सहायता की आवश्यता हुई तो हम संकोच नहीं करेंगे।

राष्ट्रपति रूहानी ने अफ़ग़ानिस्तान के संकट का उल्लेख करते हुए कहा कि तेहरान आतंकवादियों के विरुद्ध युद्ध में काबुल की सहायता करने को तैयार है। उनका कहना था कि अफ़ग़ानिस्तान में अमरीका शांति स्थापित करने के दावे के साथ आया था किन्तु अफ़ग़ानिस्तान में सुरक्षा स्थिति दिन प्रतिदिन बदतर होती जा रही है।

इस्लामी गणतंत्र ईरान के राष्ट्रपति ने ज़ायोनी शासन और कुछ अरब देशों के बीच संबंधों की स्थापना के प्रयासों की ओर संकेत करते हुए कहा कि यदि कोई यह समझता है कि ज़ायोनी शासन क्षेत्र के देशों की दोस्त है तो यह उसकी भूल है क्योंकि ज़ायोन शासन क्षेत्र के सभी राष्ट्रों और दुनिया भर के मुसलमानों का दुश्मन है। (AK)