ईरान की सहायता से क्षेत्रीय राष्ट्रों ने आतंकवाद से छुटकारा पायाः राष्ट्रपति
इस्लामी गणतंत्र ईरान के राष्ट्रपति डाक्टर हसन रूहानी ने कहा है कि गुज़रा हुआ साल आतंकवादियों के विरुद्ध ईरानी जनता की जीत और क्षेत्रीय राष्ट्रों की सफलता का वर्ष था।
राष्ट्रपति डाक्टर हसन रूहानी ने इस्लामी क्रांति की सफलता की वर्षगांठ के अवसर पर निकाली गयी भव्य रैली के अवसर पर तेहरान में आज़ादी स्क्वायर पर एकत्रित बड़ी संख्या में जनता को संबोधित करते हुए कहा कि इराक़ और सीरिया की जनता के लिए ईरान की सहायता, परिणामदायक सिद्ध हुआ और क्षेत्र के राष्ट्रों ने आतंकवाद से मुक्ति हासिल कर ली।
इस्लामी गणतंत्र ईरान के राष्ट्रपति ने इस बात पर बल देकर कहा कि षड्यंत्रकारी शक्तियां क्षेत्र के देशों को टुकड़े टुकड़े करना चाहती थीं, कहा कि इराक़ी जनता की सूझबूझ और क्षेत्रीय देशों की सहायता ने क्षेत्र में ईरान के दोस्त देशों की राष्ट्रीय एकता और सहमति को सुरक्षित रखा। उन्होंने कहा कि लेबनान की जनता की सूझबूझ और मित्र देशों के समर्थन ने इस क्षेत्र में भी अमरीका और ज़ायोनिज़्म की साज़िशों को विफल बना दिया।
इस्लामी क्रांति की वर्षगांठ के अवसर पर लाखों की संख्या में मौजूद लोगों को संबोधित करते हुए राष्ट्रपति रूहानी ने क्षेत्र में शांति और स्थिरता की स्थापना के लिए बहुपक्षीय वार्ता में भी ईरान की सफलता की ओर संकेत करते हुए कहा कि क्षेत्र की समस्याओं को राजनैतिक मार्ग द्वारा हल किया जा सकता है।
उन्होंने अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर ईरानी जनता के मुक़ाबले में अमरीका की बार बार पराजय की ओर संकेत करते हुए कहा कि अमरीकी अधिकारी, ईरान के आंतरिक मामलों में हस्तक्षेप करना चाहते थे किन्तु ईरानी जनता ने अपनी एकता और एकजुटता द्वारा उनकी साज़िशों और योजनाओं पर पानी फेर दिया।
डाक्टर हसन रूहानी ने कहा कि अमरीका ने परमाणु समझौते को जो महत्वपूर्ण क्षेत्रीय और अंतर्राष्ट्रीय समझौता है, अब तक कई बार विफल बनाने का प्रयास किया किन्तु अब तक वह इसमें विफल रहा है। उनका कहना था कि यदि अमरीकी अधिकारी परमाणु समझौते से निकलते हैं तो इसका नुक़सान बहुत जल्द भुगतेंगे।
इस्लामी गणतंत्र ईरान के राष्ट्रपति ने बैतुल मुक़द्दस, फ़िलिस्तीन और क्षेत्र की जनता के विरुद्ध अमरीकी षड्यंत्रों का उल्लेख करते हुए कहा कि दुनिया अमरीकी षड्यंत्रों के मुक़ाबले में डट गयी और केवल कुछ सरकारों को छोड़कर दुनिया के सभी देशों ने संयुक्त राष्ट्र संघ में अमरीका के इस षड्यंत्र का विरोध किया।(AK)