ईरान और भारत के बीच संबन्धों का नया चरण
भारत के राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री की ओर से राष्ट्रपति डाक्टर हसन रूहानी के नई दिल्ली में आधिकारिक स्वागत से दोनो देशों के बीच संबन्धों का नया चरण आरंभ हुआ है।
ईरान के राष्ट्रपति हसन रूहानी ने गुरूवार से भारत की तीन दिवसीय यात्रा आरंभ की थी। इस दौरान उन्होंने भारत के वरिष्ठ नेताओं के साथ भेंटवार्ताएं कीं। उनकी इस यात्रा के दौरान कई समझौतों पर हस्ताक्षर हुए।
इन समझौतों पर हस्ताक्षर से पता चलता है कि तेहरान और नई दिल्ली, द्विपक्षीय आवश्यकताओं तथा परस्पर हितों के आधार पर संबन्धों को आगे ले जाना चाहते हैं। कुछ टीकाकारों का मानना है कि भारत इस समय विकास के मार्ग पर अग्रसर है और इसे आगे बढ़ाने के लिए देशों के साथ सहयोग का इच्छुक है। अन्तर्राष्ट्रीय मामलों के एक जानकार कहते हैं कि भारत इस समय विश्व की उभरती चार अर्थव्यवस्थाओं में से एक है। इसी के साथ वह अन्तर्राष्ट्रीय पूंजी निवेश को आकर्षित करने में विश्व में पांचवें नंबर पर है।
हालिया कुछ वर्षों के दौरान ईरान और भारत के संबन्ध कुछ स्थानीय एवं अन्य कारकों से प्रभावित रहे हैं। यही कारण है कि दोनो देशों के संबन्ध तेज़ी से आगे की ओर नहीं बढ़ सके।इस प्रभाव को ऊर्जा के क्षेत्र विशेषकर शांति की पाइप लाइन के नाम से मश्हूर पाइप लाइन में देखा जा सकता है। शांति की पाइप लाइन नामक परियोजना में ईरान को दो प्रमुख समस्याओं का सामना रहा है एक पाकिस्तन और दूसरे अमरीका। इन बातों के बावजूद भारत को विश्वसनीय ऊर्जा स्रोतों की आवश्यकता है। इसी प्रकार भारत को अपने उत्पाद बेचने के लिए उत्तर-दक्षिण कारीडोर की आवश्यकता है।
यह बातें एेसी स्थिति में हैं कि ईरान अपनी स्ट्रैटेजिक स्थिति के कारण ऊर्जा की आपूर्ति के अतिरिक्त क्षेत्र में स्थिरता का कारण भी है। इसके अतिरिक्त आतंकवाद के विरुद्ध संघर्ष में ईरान ने अपनी प्रभावी भूमिका सिद्ध कर दी है। इस प्रकार से कहा जा सकता है कि क्षेत्र के दो स्वाधीन देशों के रूप में ईरान और भारत के संबन्ध विशेष महत्व के स्वामी हैं। डाक्टर हसन रूहानी की भारत यात्रा के दौरान नई दिल्ली तथा तेहरान के बीच होने वाले समझौते इसी बात की पुष्टि करते हैं।