ईरान, परमाणु समझौते का पूरी तरह से पाबंद रहा हैः आईएईए
अन्तर्राष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेन्सी ने अपनी नई रिपोर्ट में फिर यह पुष्टि की है कि ईरान, जेसीपीओए के प्रति कटिबद्ध रहा है।
आईएईए ने अपनी दसवीं रिपोर्ट में फिर इस बात की पुष्टि की है कि ईरान, परमणु समझौते के प्रति अबतक पाबंद रहा है। अन्तर्राष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेन्सी की यह रिपोर्ट, ईरान और गुट पांच धन एक के बीच हुए परमाणु समझौते का महत्वपूर्ण मानदंड है। यह परमाणु समझौता जनवरी 2016 को लागू हुआ था जिसे जेसीपीओए के नाम से भी जाना जाता है। जेसीपीओए, एक बहुआयामी व्यापक समझौता है जिसे सभी पक्षों ने स्वीकार किया है। इतना सब होने के बावजूद अमरीका अब जेसीपीओए के मार्ग में बाधाएं उत्पन्न कर रहा है।
आईएईए की ओर से परमाणु समझौते के प्रति कटिबद्ध रहने की दसवीं पर पुष्टि एेसी स्थिति में की जा रही है कि जब अमरीकी राष्ट्रपति, ईरान के विरुद्ध निराधार आरोप गढ़ने में व्यस्त हैं। इस बारे में ईरान के परमाणु ऊर्जा एजेन्सी के प्रवक्ता ने कहा है कि अमरीका के जेसीपीओए विरोधी क़दमों के कारण यूरोप को अमरीका पर अधिक से अधिक दबाव डालने के लिए आगे आना चाहिए। वाशिग्टन पोस्ट ने अपने शुक्रवार के संस्करण में लिखा है कि अमरीकी राष्ट्रपति ने कहा है कि हम इसी शर्त पर जेसीपीओए में रहेंगे कि जब ईरान छह मामलों में अपना व्यवहार बदले। ट्रम्प का कहना है कि इस काम के लिए यूरोप को सहकारिता करनी चाहिए। इसी बीच कुछ जानकारों का कहना है कि अमरीका और यूरोप के बीच परमाणु समझौते को लेकर मतभेद बढ़ते जा रहे हैं। इस बारे में अमरीकी विदेशमंत्रालय में मध्यपूर्व मामलों के पूर्व प्रभारी कहते हैं कि संयुक्त राज्य अमरीका इस संबन्ध में अलग-थलग पड़ जाएगा।
संयुक्त राज्य अमरीका यदि किसी ठोस दलील के बिना परमाणु समझौते से अलग हो जाता है तो वह यूरोप, चीन और रूस को अपने साथ नहीं रख पाएगा। ब्रिटेन में ईरान के राजदूत बईदी नेज़ाद ने कहा है कि परमाणु समझौते के बारे में ब्रिटेन तथा यूरोपीय देशों के मतभेद बहुत गंभीर हैं।