परमाणु समझौते के उल्लंघन की स्थिति में उचित जवाब दिया जाएगाः ईरान
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इस्लामी गणतंत्र ईरान के विदेशमंत्री ने कहा कि यूरोपीय देश, परमाणु समझौते में अमरीका को बाक़ी रखने के लिए सीमा से अधिक बढ़ गये हैं।
(last modified 2023-04-09T02:55:50+00:00 )
Mar ०५, २०१८ १३:३४ Asia/Kolkata
  • परमाणु समझौते के उल्लंघन की स्थिति में उचित जवाब दिया जाएगाः ईरान

इस्लामी गणतंत्र ईरान के विदेशमंत्री ने कहा कि यूरोपीय देश, परमाणु समझौते में अमरीका को बाक़ी रखने के लिए सीमा से अधिक बढ़ गये हैं।

ईरान के विदेशमंत्री ने इस बात का उल्लेख करते हुए कि यूरोपीय देश परमाणु समझौते में अमरीका को बाक़ी रखने के लिए कट्टरपंथ का शिकार और सीमा से अधिक आगे बढ़ गये हैं, कहा कि यह कट्टरपंथ, स्वयं यूरोप की नीतियों को नुक़सान पहुंचाएगा। 

विदेशमंत्री ने ईरानी  समाचार पत्र इतेमाद से बात करते हुए परमाणु समझौत को जारी रखने के लिए यूरोप को पेश की गयीं अमरीकी राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रम्प की शर्तों का उल्लेख किया और कहा कि यह देश इस स्थिति में नहीं हैं कि एेसे देश के लिए कि जिसने परमाणु समझौते पर पूरी तरह अमल किया है, शर्त लगाएं।

उन्होंने इस बात का उल्लेख करते हुए कि अमरीका और यूरोपीय देशों ने परमाणु समझौते का उल्लंघन किया है, कहा कि अमरीका ने परमाणु समझौते के बाेर में अपनी नीतियों के कारण और यूरोप ने परमाणु समझौते के संबंध में अपने वादों विशेषकर बैकिंग के विभाग में संबंधों की बहाली के बारे में अपने वचनों पर अमल न करने के कारण इस समझौते का उल्लंघन किया है। 

इस्लामी गणतंत्र ईरान के विदेशमंत्री ने इस बात पर बल देते हुए कि ईरान, वाशिंग्टन और यूरोपीय संघ  की संयुक्त कार्यवाहियों की अनदेखी नहीं करेगा, कहा कि समझता है कि इस समय ट्रम्प एेसे नारे लगा रहे हैं जिनमें से कोई एक भी व्यवहारिक नहीं होगा किन्तु यदि इन नारों को व्यवहारिक बनाया गया तो ईरान भी उसका उचित जवाब देगा। 

उन्होंने ईरान की रक्षा क्षमता के बारे में वार्ता करने के लिए पश्चिम के प्रयासों का उल्लेख करते हुए कहा कि अमरीका और पश्चिमी देशों ने केवल पिछले एक वर्ष में सऊदी अरब को 67 अरब डाॅलर के हथियार बेचे हैं जबकि फ़ार्स की खाड़ी के अरब देशों को पूर्णरूप से 116 अरब डाॅलर के हथियार बेचे हैं इसलिए ईरान की रक्षा क्षमताओं के बारे में  वार्ता बिल्कुल निराधार है।

रक्षामंत्री ने कहा कि ईरान की रक्षा क्षमताओं के बारे में यूरोपीय देशों ने बहुत बेकार और बेतुका रास्ता चुन लिया है और कुछ यूरोपीय देशों ने यह मामला उठाकर केवल अमरीकी राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रम्प की प्रसन्नता प्राप्त करने का प्रयास किया है किन्तु आख़िरकार उन्हें भी कोई परिणाम हासिल नहीं होगा। 

उन्होंने यमन संकट का उल्लेख करते हुए इस संकट को हल करने पर बल दिया और कहा कि यूरोप, यमन संकट के हल करने में सकारात्मक भूमिका अदा  करना चाहता है तो उसे यमनी जनता के जनसंहार के लिए हथियार देना बंद करने होंगे। (AK)