यूरोपीय अधिकारी, अमरीकी दबाव में आ जाते हैंः विदेशमंत्री
इस्लामी गणतंत्र ईरान के विदेशमंत्री मुहम्मद जवाद ज़रीफ़ ने परमाणु समझौते के बारे में कुछ यूरोपीय देशों के रवैयों और अमरीकी दबाव स्वीकार करने के कारण उनकी निंदा की।
ईरान के विदेशमंत्री मुहम्मद जवाद ज़रीफ़ ने सोमवार की शाम तेहरान में फ़्रांस के विदेशमंत्री जियान एवो ले दरयान से मुलाक़ात में कहा कि परमाणु समझौता जो एक अंतर्राष्ट्रीय समझौता है और जिस पर ईरान की ओर से अमल की आईएईए ने अपनी दस रिपोर्टों में पुष्टि की है, अब अमरीकी अधिकारी अतार्किक और राजनीतिकरण का निशाना बन गये गया है।
उन्होंने कहा कि यूरोप को चाहिए कि वह परमाणु समझौते पर पूरी तरह अमल करे और इस पर अमल करने के लिए अमरीका पर भी दबाव डाले।
विदेशमंत्री मुहम्मद जवाद ज़रीफ़ ने कहा कि यूरोप को इस बात की अनुमति नहीं देना चाहिए कि अमरीका अपने वचनों का उल्लंघन करने के बावजूद अतार्किक और ग़ैर क़ानूनी मांगे ज़बान पर लाए।
ईरान के विदेशमंत्री ने क्षेत्र के संकटों को हल करने के लिए ईरान के प्रयासों और सुझावों का उल्लेख करते हुए कहा कि यूरोप यदि सही अर्थों में क्षेत्र में संकटों और मानवीय त्रासदियों को समाप्त करना चाहता है तो वह इस संबंध में ईरान से विचार विमर्श और उसके सुझाव से लाभ उठा सकता है किन्तु यदि लक्ष्य केवल प्रोपेगैंडा अभियान या अमरीका की प्रसन्नता हासिल करना है तो फिर ईरान उसके साथ नहीं होगा।
विदेशमंत्री मुहम्मद जवाद ज़रीफ़़ ने कहा कि ईरान के मीज़ाइल कार्यक्रम का परमाणु समझौते से कोई लेना देना नहीं है यहां तक कि सुरक्षा परिषद के प्रस्ताव क्रमांक 2231 में भी इसका कोई उल्लेख नहीं है।
उनका कहना था कि अमरीका और दूसरे देश कि जिन्होंने क्षेत्र के देशों को व्यापक हथियार बेचकर इस क्षेत्र को हथियारों और गोलाबारूद के ढेर में बदल दिया है, अपनी इन कार्यवाहियों को बंद करें।
विदेशमंत्री मुहम्मद जवाद ज़रीफ़ ने कहा कि ईरान की रक्षा क्षमता, देश की रक्षा के लिए है और ईरान अपनी जनता की रक्षा के लिए अपनी रक्षा क्षमताओं पर भी भरोसा करता है।
फ़्रांस के विदेशमंत्री ने भी इस मुलाक़ात में कहा कि उनके देश ने परमाणु समझौते पर अमल के लिए विभिन्न कार्यवाहियां अंजाम दी हैं जिनमें ईरान के आटो मोबाइल उद्योग और ऊर्जा के क्षेत्र में पूंजीनिवेश भी शामिल है।
उनका कहना था कि फ़्रांस ने संयुक्त योजनाओं में भी पूंजीनिवेश किया है। फ़्रांसीसी विदेशमंत्री ने यह भी कहा कि पेरिस, तेहरान के साथ मज़बूत मैत्रीपूर्ण संबंध स्थापित करना चाहता है और यूरोप विशेषकर फ़्रांस अमरीकी दबाव के बावजूद परमाणु समझौते पर अमल करने पर प्रतिबद्ध है। (AK)