अमरीका ने कभी भी परमाणु समझौते का पालन नहीं कियाः डाक्टर रूहानी
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इस्लामी गणतंत्र ईरान के राष्ट्रपति डाक्टर हसन रूहानी ने अमरीकी राष्ट्रपति ट्रम्प की ओर से परमाणु समझौते से अमरीका के निकल जाने की घोषणा के बाद देश की जनता को संबोधित करते हुए कहा कि अमरीका ने कभी भी परमाणु समझौते के तहत अपनी प्रतिबद्धताओं का पालन नहीं किया और इस बात की पहले से ही अपेक्षा थी कि वह परमाणु समझौते से निकल सकता है।
(last modified 2023-04-09T02:55:50+00:00 )
May ०९, २०१८ ०२:५१ Asia/Kolkata
  • अमरीका ने कभी भी परमाणु समझौते का पालन नहीं कियाः डाक्टर रूहानी

इस्लामी गणतंत्र ईरान के राष्ट्रपति डाक्टर हसन रूहानी ने अमरीकी राष्ट्रपति ट्रम्प की ओर से परमाणु समझौते से अमरीका के निकल जाने की घोषणा के बाद देश की जनता को संबोधित करते हुए कहा कि अमरीका ने कभी भी परमाणु समझौते के तहत अपनी प्रतिबद्धताओं का पालन नहीं किया और इस बात की पहले से ही अपेक्षा थी कि वह परमाणु समझौते से निकल सकता है।

डाक्टर हसन रूहानी ने मंगलवार की रात अमरीकी राष्ट्रपति ट्रम्प के फ़ैसले के जवाब में कहा कि अब यह समझौता ईरान और दुनिया के पांच देशों रूस, चीन, फ़्रांस, ब्रिटेन और जर्मनी के बीच रहेगा। राष्ट्रपति रूहानी ने कहा कि मैंने विदेश मंत्रालय को आदेश दिया है कि वह समझौते में शामिल अन्य देशों के साथ इस स्थिति के बारे में सघन वार्ताएं करें और इस बात को सुनिश्चित करें कि ईरान के हित सुरक्षित रहेंगे।

डाक्टर रूहानी ने कहा कि यदि ईरान के हित सुरक्षित न रहे तो ईरान पुनः औद्योगिक स्तर पर यूरेनियम का संवर्धन शुरू कर देगा और इसके लिए परमाणु ऊर्जा संस्था को पूरी तरह तैयार रहने के निर्देश दे दिए गए हैं।

डाक्टर रूहानी ने कहा कि हर प्रकार की परिस्थितियों का सामना करने के लिए पहले से ही तैयारियां पूरी कर ली गई हैं अतः आने वाले सप्ताहों, महीनों या वर्षों में ईरान की जनता को किसी प्रकार की कोई समस्या पेश नहीं आएगी। 

डाक्टर रूहानी ने कहा कि ईरान की इस्लामी क्रान्ति के 40 वर्षीय इतिहास के दौरान बल्कि उससे पहले भी साबित हो चुका है कि ईरानी राष्ट्र और क्षेत्र के बारे में अमरीकियों का रवैया शत्रुतापूर्ण रहा है और कभी भी उन्होंने क्षेत्र या विश्व की शांति व सुरक्षा के लिए काम नहीं किया है।

डाक्टर रूहानी ने कहा कि ट्रम्प का फ़ैसला ईरानी राष्ट्र के खिलाफ़ एक मनोवैज्ञानिक युद्ध की शुरुआत है लेकिन ईरानी राष्ट्र इस मनोवैज्ञानिक युद्ध से प्रभावित नहीं होगा।