फिलिस्तीन निश्चित रूप स्वतंत्र होगा, अमरीका निश्चित रूप से हारेगा।
इस्लामी क्रांति के वरिष्ठ नेता आयतुल्लाहिल उज़मा सैयद अली ख़ामेनई ने बल दिया है कि बैतुलमुक़द्दस फिलिस्तीन की राजधानी है और ईश्वरीय मदद से फिलिस्तीन दुश्मनों के हाथों से छूट जाएगा और अमरीका और उसके एजेन्ट, ईश्वरीय संकल्प के सामने कुछ नहीं कर पाएंगे।
वरिष्ठ नेता ने कहा कि अमरीका और बहुत सी पश्चिमी सरकारें, ज़ायोनियों के अपराधों में भागीदार हैं। फिलिस्तीन का मुद्दा, इस्लामी राष्ट्र और इस्लामी सरकारों के लिए संयुक्त चिंता का विषय है और मूल रूप से इस्लामी देशों की नीतियां इसी आधार पर बनायी जानी चाहिए लेकिन कुछ इस्लामी देशों की कमियों की वजह से ज़ायोनियों के लिए रास्ता साफ हो गया है और वह दिन प्रतिदिन आतंकवादी कार्यवाहियों में तेज़ी ला रहे हैं और चूंकि उन्हें अमरीका का भरपूर समर्थन प्राप्त है इस लिए सुरक्षा परिषद और विश्व समुदाय की ओर से किसी प्रकार की गंभीर प्रतिक्रिया का भी कोई भय नहीं है।क़तर के विश्लेषक सालेह अन्नुआमी ने इस संदर्भ में लिखा है कि अमरीका चूंकि इस्राईल के अपराधों पर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पर्दा डालता रहता है इस लिए फिलिस्तीनियों के दमन का भारी मूल्य इस शासन को चुकाना नहीं पड़ता और क्षेत्रीय वातावरण भी कुछ एेसा है कि जिसकी वजह से इस्राईल को फिलिस्तीनियों के विरुद्ध बल प्रयोग में कोई संकोच नहीं होता।
यह एक कड़वी सच्चाई है कि फिलिस्तीनियों के समर्थन में इस्राईल के खिलाफ इस्लामी जगत से संयुक्त आवाज़ सुनाई नहीं देती इसी लिए प्रतिरोध का मोर्चा ही अपने तरीक़े से फिलिस्तीनी देश के गठन के प्रयास में है। शुक्रवार को इस्तांबूल में इस्लामी सहयोग संगठन ओआईसी की अपातकालीन बैठक से विश्व समुदाय और फिलिस्तीन की पीड़ित जनता को यह उम्मीद है कि इस बैठक में फिलिस्तीन के बारे में इस्लामी देश , ठोस रुख अपनाएगें और ज़ायोनी शासन के अत्याचारों और अपना दूतावास, बैतुलमुक़द्दस स्थानान्तरित करने के अमरीका के गैर कानूनी फैसले की कड़ी आलोचना करेंगे और ज़ायोनी शासन का बहिष्कार करेंगे। (Q.A.)