इस्लामी देशों और इस्राईल के बीच संबंध बनाने की साज़िश नाकामः आईआरजीसी
https://parstoday.ir/hi/news/iran-i64454-इस्लामी_देशों_और_इस्राईल_के_बीच_संबंध_बनाने_की_साज़िश_नाकामः_आईआरजीसी
इस्लामी क्रांति संरक्षक बल सिपाहे पासदारान आईआरजीसी ने फ़िलिस्तीन में ज़ायोनी विरोधी इंतेफ़ाज़ा शुरु होने और प्रतिरोध के विचार फैलाने को बैतुल मुक़द्दस की स्वतंत्रता के लक्ष्य को प्राप्त करने में फ़िलिस्तीनी और मुस्लिम राष्ट्रों की नर्म शक्ति बताया है।
(last modified 2023-11-29T05:45:15+00:00 )
Jun ०७, २०१८ १३:३९ Asia/Kolkata
  • इस्लामी देशों और इस्राईल के बीच संबंध बनाने की साज़िश नाकामः आईआरजीसी

इस्लामी क्रांति संरक्षक बल सिपाहे पासदारान आईआरजीसी ने फ़िलिस्तीन में ज़ायोनी विरोधी इंतेफ़ाज़ा शुरु होने और प्रतिरोध के विचार फैलाने को बैतुल मुक़द्दस की स्वतंत्रता के लक्ष्य को प्राप्त करने में फ़िलिस्तीनी और मुस्लिम राष्ट्रों की नर्म शक्ति बताया है।

आईआरजीसी ने विश्व क़ुद्स दिवस के अवसर पर गुरुवार को जारी अपने बयान में कहा कि इमाम ख़ुमैनी की एेतिहासिक पहल करते हुए 39 साल पहले पवित्र रमज़ान के अंतिम शुक्रवार को विश्व क़ुद्दस दिवस का नाम दिया था इसीलिए आज फ़िलिस्तीन का मुद्दा और बैतुल मुक़द्दस की स्वतंत्रता का विषय, एक अंतर्राष्ट्रीय और वैश्विक विषय में बदल चुका है।

आईआरजीसी के बयान में आया है कि विश्व क़ुद्स दिवस जहां एक ओर फ़िलिस्तीन के मुसलमानों और अत्याचार ग्रस्त जनता के व्यापक समर्थन के लिए एकता का पाठ सिखा दिया है और दूसरी ओर इसने ज़ायोनी शासन और साम्राज्यवादी मोर्चे को हर समय से अधिक कमज़ोर दौर में खड़ा दिया है। 

आईआरजीसी के बयान में आया है कि फ़िलिस्तीन के वापसी मार्च के साथ प्रतिरोध नये और प्रभावी चरण में प्रविष्ट हो गया है और ग़ज़्ज़ा पट्टी पर हर दिन फ़िलिस्तीनी जनता के जनसंहार में ज़ायोनियों के नये अपराधों को देखा जा रहा है जिससे पता चलता है कि अतिग्रहणकारियों के विरुद्ध प्रतिरोध की भावना, फ़िलिस्तीनी जवानों में रची बसी गयी है 

ज्ञात रहे कि इस्लामी गणतंत्र ईरान के संस्थापक स्वर्गीय इमाम ख़ुमैनी ने फ़िलिस्तीनियों से सहृदयता व्यक्त करने के लिए पवित्र रमज़ान के अंतिम शुक्रवार को विश्व क़ुद्स दिवस बनाने की अपील की थी। (AK)