हुर्मुज़ स्ट्रेट बंद करने की धमकी से ट्रम्प क्या समझे?
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हुर्मुज़ स्ट्रेट बंद करने की बात यद्यपि एक प्रतीकात्मक बात थी किन्तु यह बहुत से संदेश लिए हुए थी और यह समझा जाता है कि इस बात को अमरीकी राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रम्प से ज़्यादा कोई और नहीं समझ पाया।
(last modified 2023-11-29T05:45:15+00:00 )
Jul २४, २०१८ १३:०० Asia/Kolkata
  • हुर्मुज़ स्ट्रेट बंद करने की धमकी से ट्रम्प क्या समझे?

हुर्मुज़ स्ट्रेट बंद करने की बात यद्यपि एक प्रतीकात्मक बात थी किन्तु यह बहुत से संदेश लिए हुए थी और यह समझा जाता है कि इस बात को अमरीकी राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रम्प से ज़्यादा कोई और नहीं समझ पाया।

ईरान के राष्ट्रपति डाक्टर हसन रूहानी ने अमरीकी राष्ट्रपति के ड्रामेबाज़ी के बाद एक साधारण से बयान में कहा था कि फ़ार्स की खाड़ी में या ईरान को तेल निर्यात करने का अधिकार होगा या किसी को भी नहीं। राष्ट्रपति रूहानी का यह बयान, ट्रम्प की धमकियों और ईरान पर अधिक दबाव डालने जाने की घोषणा के बाद फ़ार्स की खाड़ी के कुछ देशों की प्रतिसन्नता का राजनैतिक जवाब था किन्तु जैसे ही राष्ट्रपति रूहानी ने यह बयान दिया, क़ुद्स ब्रिगेड के कमान्डर जनरल सुलैमानी ने बयान का स्वागत करते हुए एक अभियान के व्यवहारिक होने की पुष्टि की जबकि ईरान के विभिन्न अधारियों और राजनैतिक धड़ों ने बयान का भरपूर स्वागत किया और कहा कि राष्ट्रपति का यह बयान पूर्ण रूप से गंभीर है। इस्लामी गणतंत्र ईरान के राष्ट्रपति डाक्टर हसन रूहानी के इस बयान की वरिष्ठ नेता ने भी सराहना की और ईरान के विरुद्ध किसी भी प्रकार के ख़तरे की स्थिति में इसके व्यवहारिक होने की गैरेंटी दी।

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उसके बाद से इस विषय पर पूरी दुनिया में चर्चा होने लगा और ईरान की घोषणा, पूरी तरह से गंभीर रूप धारण कर चुकी थी और फिर ट्रम्प से कहा गया कि ट्रम्प साहब! शेर की दुम से खिलवाड़ मत करो। ट्रम्प धमकियों के चरम पर पहुंच गये और उन्होंने राष्ट्रपति रूहानी को संबोधित करते हुए कहा कि कभी भी अमरीका को धमकी मत देना, नहीं तो ऐसी मुसिबत में फंस जाओगे जो इतिहास में भी नहीं देखी होगी।

इन धमकियों से हटकर यदि देखा जाए तो ट्रम्प, ईरान से पहले भी अफ़्रीक़ा की जनता और सीरिया के राष्ट्रपति बश्शार असद को भी इसी तरह या इससे बढ़कर धमकी दे चुके हैं। यहां पर ध्यान योग्य बात यह है कि मानो ईरान के साथ मुक़ाबले में ट्रम्प को एक ऐसा संदेश मिल गया जिसकी उन्हें आशा नहीं थी। इसी प्रकार ट्रम्प और अमरीकी अधिकारियों के हालिया बयानों के बाद वाशिंग्टन के अधिकारी यह सोच रहे थे कि ईरानी अधिकारी संपर्क करेंगे और वार्ता की मेज़ पर आने की बात स्वीकार कर लेंगे किन्तु ईरानी अधिकारियों ने भी कसर नहीं छोड़ी। ईरान के विरुद्ध ट्रम्प के लहजे में तेज़ी आने की एक वजह यह भी हो सकती है कि ईरान पर प्रतिबंधों को लौटाने की अवधि अर्थात छह अगस्त की तारीख़ भी निकट आ रही है।

बहरहाल ट्रम्प के बयानों के बाद ईरानी अधिकारियों ने ताबड़तोड़ और मुंहतोड़ जवाब दिए और वह किसी भी तरह से अमरीकी अधिकारियों से पीछे नहीं रहे।

वास्तविकता यह है कि ईरान के साथ ट्रम्प के बर्तावों से यह पता चल गया है कि अमरीका का यह व्यापारी राजनीति से अनभिज्ञ है बल्कि वह इतिहास और भूगोल भी भुला बैठा है। ट्रम्प राजनीति से परे हैं इसका अर्थ यह है कि यदि उन्हें पता होता कि तो वह इस तरह की बातें न करते, राजनीति नहीं आती इसका मतलब यह है कि ट्वीटर जैसी सोशल मीडिया को अपने मनोरंजन और खेलकूद के लिए प्रयोग न करते, स्वयं को सबसे बड़ा राजनीतिज्ञ न समझते और ख़ुद को तथा अपने देश को यूरोपीय, एशियाई, रूसी, मध्यपूर्वी, अफ़्रीक़ी और अमरीकी संकट में न फंसाते। यदि उनको राजनीति आती तो उनकी समझ में आता कि एक राष्ट्रपति के रूप में इस प्रकार के उनके बयान के कितने नुक़सान हैं।

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इतिहास भी नहीं आता, यदि उनको इतिहास का ज्ञान होता या कम से कम पिछले दो दश्कों के इतिहास के बारे में उनको पता होता तो वह ईरान को धमकी देने से पहले सौ बार सोचते। यहां पर यह बात स्पष्ट हो जाती है कि न तो ट्रम्प को ही इतिहास का ज्ञान है और न ही उनके सलाहकार को, इराक़ और अफ़ग़ानिस्तान पर हमले को वह भूल गये और इन दलदलों से निकलने के लिए इधर उधर हाथ पैर मार रहे हैं। उनको भूगोल भी पता नहीं है, अगर पता होता तो उनकी समझ में आ जाता कि हुर्मुज़ स्ट्रेट केवल एक प्रतीक है, ईरान के पास धमकियों का जवाब देने के लिए कई स्ट्रेट हैं।

ईरान के पास, प्रतिरोध, मीज़ाइल क्षमता, शांतिपूर्ण परमाणु क्षमता, क्षेत्र में अमरीकी सैन्य छावनियों तक पहुंच और इन सबसे बढ़कर मध्यपूर्व में ट्रम्प का लाडला इस्राईल जैसे कई स्ट्रेट है। अब ट्रम्प को ईरानी राष्ट्रपति और अधिकारियों की धमकियों का सही से अनुमान हो गया होगा। (AK)