इस्लामी क्रांति का भविष्य उज्जवल, वरिष्ठ नेता का एलान
इस्लामी क्रांति के वरिष्ठ नेता आयतुल्लाहिल उज़मा सैयद अली ख़ामेनई ने विदेशों में सक्रिय सांस्कृतिक कार्यकर्ताओं से एक भेंट में, क्रांति के भविष्य के बारे में पायी जाने वाली चिंताओं का उत्तर देते हुए कहा कि क्रांति का कोई कुछ बिगाड़ नहीं पाएगा, यह सब से कह दें।
वरिष्ठ नेता की ओर से एेसे हालात में यह ठोस रुख कि जब अमरीका ने ईरान के खिलाफ प्रतिबंधों के पहले चरण को लागू कर दिया है, अमरीकी नेताओं और उनके क्षेत्रीय पिट्टुओं के लिए ठोस संदेश है।
ईरान के खिलाफ प्रतिबंधों के पहले चरण को लागू करने के बाद अमरीकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने ट्विट किया यह अब तक लगाए जाने वाले सब से अधिक कड़े प्रतिबंध हैं। दर अस्ल जेसीपीओए से निकलने के बाद ट्रम्प ने ईरान पर अधिक से अधिक दबाव डालने की नीति अपनायी है ताकि इस तरह से ईरान की भूमिका में बदलाव लाया जाए और दबाव की वजह से ईरान के भीतर असंतोष फैले और वह सपना पूरा हो जाए जो अमरीकी नेता चालीस वर्षों से देख रहे हैं। ट्रम्प का मक़सद, इस्राईल और कुछ अरब शासकों की मदद से ईरान के मिसाइली कार्यक्रम को रोकना , ईरान की क्षेत्रीय भूमिका को खत्म करना और ईरान के तेल निर्यात को शून्य तक पहुंचाना है जिससे ईरान के खिलाफ अमरीका की दुश्मनी का पता चलता है। अमरीका में ट्रम्प की सरकार भी अन्य अमरीकी सरकारों की भांति इस्लामी क्रांति को अपने वर्चस्ववादी उद्देश्यों की राह में रोड़ा समझती है और इसे लिए उसे खत्म करने का प्रयास कर रही है लेकिन चालीस वर्षों के अनुभव से यह सिद्ध हो गया है कि डट कर मुक़ाबला करना, इस क्रांति की विशेषता है।
वरिष्ठ नेता ने भी अपने बयान में स्पष्ट रूप से कहा है कि अमरीकी, ईरान में क्रांति से पहले की अपनी भूमिका के इच्छुक हैं और वह इस से कम पर खुश नहीं होंगे। वास्तव में इस्लामी गणतंत्र ईरान पश्चिम एशिया के महत्वपूर्ण इलाक़े का एक ताक़तवर देश है और अमरीका के विरोध के बावजूद वह क्षेत्रीय समीकरण में प्रभावशाली भूमिका निभाता है , ईरान पर अमरीका और उसके पिट्टुओं की ओर से दबाव का मुख्य कारण भी यही है किंतु स्पष्ट सी बात है ईरानी जनता का प्रतिरोध हमेशा की तरह , हर साज़िश को विफल बनाता रहेगा।(Q.A.)