क्यों ईरानी मिसाइल बने अमरीका व इस्राईल की आंखों का कांटा!
ईरान के रक्षा मंत्री ब्रिगेडियर जनरल अमीर हातमी ने कहा है कि ईरान, मिसाइल कार्यक्रम की राह में आने वाली हर रुकावट को दूर कर देगा क्योंकि ईरान का रक्षा उद्योग, देश की स्वाधीनता, सुरक्षा और स्थिरता को निश्चित बनाने का एक महत्वपूर्ण तत्व है।
उन्होंने ईरान के " फातेह मुबीन" मिसाइल के अनावरण के समय एक कार्यक्रम में कहा कि आज ईरानी मिसाइल को कोई बाधा रोक नहीं सकती।
फ़ातेह मुबीन मिसाइल नई पीढ़ी का मिसाइल जो धरती और समुद्र में अपने लक्ष्य को सटीकता के साथ भेदने की क्षमता रखता है।
यह मिसाइल 24 घंटे के दौरान किसी भी समय और किसी भी प्रकार के मौसम अर्थात बारिश, कोहरे और दुश्मनों के इलेक्ट्रानिक हमले के समय, धरती और समुद्र में अपने लक्ष्य को अच्छी तरह से पहचान कर उसे नष्ट कर सकता है।
अमरीकी इन्टरप्राइसेज़ संस्था ने , " ईरान का रक्षा भविष्य" शीर्षक के अंतर्गत एक रिपोर्ट प्रकाशित की है जिसमें ईरान की बैलिस्टिक मिसाइल शक्ति के बारे में लिखा है कि " जब ईरानी इंजीनियर, स्कड मिसाइल खुद ही बनाने में सफल हो गये तो ईरान का बैलिस्टिक मिसाइल उद्योग, इस देश के रक्षा उद्योग में अंगूठी के नगीने की तरह समझा जाने लगा। "
रिपोर्ट के लेखक मिक एनिस ने इस बात पर बल देते हुए कि तेहरान हथियारों के स्वदेशीकरण का प्रयास कर रहा है, ईरान के इस संकल्प को , पश्चिम की ओर से लगाए जाने वाले प्रतिबंधों का परिणाम बताया है।
दर अस्ल ईरान की ओर से हथियारों के क्षेत्र में आत्मनिर्भरता की एक बड़ी वजह, ईरान पर थोपे गये युद्ध के दौरान, प्राप्त होने वाला कड़वा अनुभव है। यह युद्ध विश्व शक्तियों की ओर से व्यापक समर्थन के साथ सद्दाम सरकार की ओर से आरंभ किया गया था और इस युद्ध के दौरान, सद्दाम की सेना की ओर से बड़े पैमाने पर ईरान के विभिन्न नगरों पर मिसाइल हमलों से ईरान को भारी नुक़सान उठाना पड़ा था यही वजह है कि आज अमरीका, ईरान के मिसाइल कार्यक्रम को अपने सामने एक बहुत बड़ी बाधा समझता है और इसी लिए वह झूठे दावे करके ईरान के रक्षा उद्योग और रक्षा की दिशा में उठाए गये क़दमों को, खतरा दर्शाने की कोशिश कर रहा है।
अलबत्ता अमरीका की इस प्रकार की कोशिशों से प्रभावित हुए बिना, ईरान रक्षा क्षेत्र में तेज़ी से आगे बढ़ रहा है।
इस्लामी गणतंत्र ईरान के विदेशमंत्री जवाद ज़रीफ ने जर्मनी के प्रसिद्ध पत्रकार यूर्गन तूदेनहूफर से एक इन्टरव्यू में कहा कि हम इलाक़े में अन्य देशों की तुलना में सब से कम हथियारों पर खर्च करते हैं, सऊदी अरब के पास अधिक दूर तक मार करने वाले मिसाइल हैं जो परमाणु हथियारों से भी लैस हो सकते हैं जबकि ईरान के मिसाइलों को इस क्षमता के साथ डिज़ाइन ही नहीं किया गया है।
ध्यान देने वाली बात यह है कि इस सच्चाई के बावजूद, अमरीका, सऊदी अरब के बजाए ईरान के मिसाइलों को खतरा बता रहा है क्योंकि सऊदी अरब को तो खुद उसने हथियार बेचे हैं और भविष्य में बेचना है।
दर अस्ल अमरीका को ईरान की मिसाइलों से खतरा नहीं बल्कि इन मिसाइलों से ईरान की बढ़ती ताक़त, उसके लिए चिंता का विषय है और यही वजह है कि अमरीका ने सारा ध्यान ईरान की मिसाइल क्षमता पर केन्द्रित कर रखा है।
क्षेत्र में ईरान की शक्तिशाली भूमिका की वह से अमरीका, इस्राईल और सऊदी अरब का त्रिकोण, अपने उद्देश्यों को पूरा नहीं कर पास रहा है , ताक़तवर ईरान से अमरीका की समस्या का मुख्य कारण यही है।
इस्लामी क्रांति के वरिष्ठ नेता, आयतुल्लाहिल उज़मा सैयद अली ख़ामेनई ने हालिया दिनों में अपने एक बयान में स्पष्ट रूप से कहा है कि क्षेत्र में ईरान की उपस्थिति और क्षेत्रों के राष्ट्रों की ओर से ईरान का समर्थन, ईरान की रणनीति का आधार है और कोई भी अक्ल रखने वाली सरकार, शक्ति के इन तत्वों की अनदेखी नहीं कर सकती। (Q.A.)