क्या ट्रम्प और रूहानी की मुलाक़ात होगी?
इस्लामी गणतंत्र ईरान के राष्ट्रपति डाक्टर हसन रूहानी ने कहा है कि न्यूयार्क में रहने के दौरान अमरीकी राष्ट्रपति के साथ मुलाक़ात का कोई कार्यक्रम नहीं।
न्यूयार्क में अमरीकी टेलीवीजन एनबीसी से साक्षात्कार में डाक्टर हसन रूहानी ने स्पष्ट किया कि अमरीकी राष्ट्रपति ने ऐसी स्थिति पैदा कर दी है जिसमें ऐसी किसी मुलाक़ात की कोई संभावना ही पैदा नहीं होती।
राष्ट्रपति रूहानी का कहना था कि यदि ट्रम्प जैसा कोई व्यक्ति वार्ता, बातचीत और संबंधों में प्रगति का इच्छुक है तो उसे फिर प्रतिबंधों के हथकंडे से काम नहीं लेना चाहिए।
उन्होंने कहा कि जब कोई सरकार किसी दूसरी सरकार के विरुद्ध एड़ी चोटी का ज़ोर लगा दे तो इसका स्पष्ट अर्थ यह है कि वह मामले को हल करने का संकल्प नहीं रखती।
राष्ट्रपति डाक्टर हसन रूहानी का कहना था कि अमरीका अंतर्राष्ट्रीय नियमों और क़ानूनों के विरुद्ध परमाणु समझौते से बाहर निकल गया और उसने सुरक्षा परिषद के अनिवार्य प्रस्ताव 2231 का हनन किया किन्तु जब तक इस समझौते में बाक़ी बचे पांच देशों की ओर से परमाणु समझौते के अंतर्गत ईरान के हितों की रक्षा की जाती रहेगी तेहरान भी इस समझौते में बाक़ी रहेगा।
उन्होंने अमरीका के इस दावे को कड़ाई से रद्द कर दिया कि ईरान के मीज़ाइल कार्यक्रम और परमाणु गतिविधियों तथा क्षेत्रीय भूमिका की वजह से वाशिंग्टन परमाणु समझौते से निकला है।
राष्ट्रपति ने कहा कि अमरीका आम नागरिकों के विरुद्ध परमाणु हथियार प्रयोग करने वाला एकमात्र देश है और सैकड़ों परमाणु हथियार रखने वाले ज़ायोनी शासन का भरपूर समर्थन करता है तथा विभिन्न बहानों से ईरानी जनता पर दबाव डालता चला आया है।
डाक्टर हसन रूहानी ने यमन और सीरिया के बारे में ईरान की नीतियों का उल्लेख करते हुए कहा कि कुछ देशों के विपरीत तेहरान, सीरिया संकट और यमन युद्ध के आरंभ से ही इस बात पर बल देता आया है कि युद्ध और झड़पों का क्रम बंद होना चाहिए।
उन्होंने कहा कि ईरान ने सीरिया संकट और यमन संकट के राजनैतिक हल की हर संभव कोशिश की है और सीरिया के हवाले से रूस तथा तुर्की के साथ तेहरान का सहयोग, इसका स्पष्ट उदाहरण है।
राष्ट्रपति ने एक बार फिर तेहरान के इस दृष्टिकोण को दोहराया कि सीरिया में ईरान के सैन्य सलाहकारों की तैनाती इस देश की क़ानूनी सरकार की मांग पर अंजाम पायी है।
उन्होंने कहा कि जब तक सीरियाई सरकार चाहेगी ईरान के सैन्य सलाहकार आतंकवादियों के विरुद्ध युद्ध में सहयोग के लिए दमिश्क़ में मौजूद रहेंगे। (AK)