ज़ाहेदान हमले का बदला लिया जाएगाः ईरान
ईरान की सर्वोच्च राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद के सचिव ने कहा है कि ज़ाहेदान में हुए हालिया आतंकी हमले का इंतेक़ाम लिया जाएगा।
13 फ़रवरी बुधवार को सीस्तान व बलोचिस्तान प्रांत के ज़ाहेदान-ख़ाश हाईवे पर सीमा सुरक्षा बल के जवानों को ले जा रही एक बस पर आतंकवादी हमला हुआ था जिसमें सीमा सुरक्षा बल के 27 जवान शही और 13 अन्य घायल हो गये थे। आतंकवाद ी गुट जैशुज़्ज़ुलम ने इस आतंकी हमले की ज़िम्मेदारी स्वीकार की थी।
ईरान की सर्वोच्च राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद के सचिव श्री अली शमख़ानी ने पत्रकारों से बात करते हुए ज़ाहेदान आतंकी हमले के ज़िम्मेदारों से बदला लेने के बारे में सर्वोच्च राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद की बैठक के परिणाम के बारे में पूछे गये सवालों का जवाब देते हुए कहा कि पाकिस्तान सरकार पर ज़िम्मेदारी है कि वह अपनी सीमाओं की रक्षा करते हुए ईरान में क्रांति विरोधी तत्वों की घुसपैठ को रोकेगी।
उन्होंने इसी प्रकार सीरिया में ईरान के सलाहकारों की उपस्थिति के बारे में कहा कि सीरिया की क़ानूनी सरकार के निमंत्रण पर हमारे सलाहकार उपस्थित हैं।
उन्होंने कहा कि इस्लामी गणतंत्र ईरान सीरिया की जनता की मदद करने तथा इस देश में शांति की स्थापना के लिए सीरिया सरकार के निमंत्रण पर गया और वहां इस समय मौजूद है और जब तक सीरिया की सरकार चाहेगी, हमारी उपस्थिति जारी रहेगी।
उन्होंने देश की मीज़ाइल क्षमता के बारे में कभी कहा कि तेहरान, मीज़ाइलों की दूरी, विध्वंसक शक्ति, सूक्ष्मता और जल्दी तैयार होने जैसे मीज़ाइल शक्ति के चार मुद्दों पर किसी से परामर्श नहीं कर करता और किसी भी देश से अनुमति नहीं लेगा।
ईरान की सर्वोच्च राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद के सचिव श्री अली शमख़ानी ने पत्रकारों से बात करते हुए कहा कि दुनिया में अमरीका की शक्ति पतन का शिकार हो रही हैै।
उन्होंने कहा कि यद्यपि अमरीका, पश्चिमी देश और क्षेत्र के कुछ रूढ़ीवादी देशों ने आतंकवादी तत्वों और एजेन्टों को अपनी सेवा के लिए प्रयोग किया ताकि इस्लामी प्रतिरोध की जड़ों को सुखा दें किन्तु प्रतिरोध के जवानों, सीरिया की सेना, इराक़ के हश्दुश्शाबी, यमन के अंसारुल्लाह और हज़रत ज़ैनब सलामुल्लाह अलैहा के रौज़े की रक्षा करने वालों ने दिखा दिया कि पश्चिम दुनिया का ध्रुव नहीं है और अमरीकी शक्ति से बनने वाली काग़ज़ की मूर्ति सरलता से ढह सकती है।
ईरान की सर्वोच्च राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद के सचिव ने क्षेत्र में तकफ़ीरी आतंकवादियों की पराजय की ओर संकेत करते हुए कहा कि इस्लामी जगत के सामने मौजूद सबसे महत्वपूर्ण और जटिल ख़तरा जो इस्लामी धरतियों पर तकफ़ीरी आतंकवादियों को थोपना था, प्रतिरोध की सभ्यता व संस्कृति में प्रशिक्षित युवाओं के बलिदानों से विफल हो गया है।
उन्होंने कहा कि अवैध अधिकृत फ़िलिस्तीन की धरती में सुरक्षा की स्थापना के लिए भारी मात्रा में रक़म ख़र्च किए जाने के बावजूद इस्राईल की सीमाओं की रक्षा के लिए अमरीका और क्षेत्र के रूढ़ीवादी देशों की रणनीति आज बंद गली में पहुंच गयी है और ज़ायोनी शासन को अपनी ही सीमाओं यहां तक अपनी सीमाओं के भीतर ही अधिक ख़तरे का आभास होने लगा है। (AK)