14 जून 2015 को हुआ था जेसीपीओए या परमाणु समझौता
जेसीपीओए या परमाणु समझौता 14 जून 2015 को हुआ था। यह समझौता ईरान तथा गुट पांच धन एक के बीच हुआ। परमाणु समझौता 16 जनवरी 2016 को लागू हुआ था। अमरीका ने परमाणु समझौते के लागू होने के साथ ही इसके बारे में उल्लंघन आरंभ कर दिये।
डोनाल्ड ट्रम्प के वाइट हाउस में पहुंचने से अमरीका की ओर से उल्लंघन बढ़ने लगे। उन्होंने कई बार धमकी दी कि अमरीका, परमाणु समझौते से निकल जाएगा। अंततः 8 मई 2018 को ट्रम्प ने एकपक्षीय रूप में अमरीका को जेसीपीओए से अलग कर दिया। इसके बाद उन्होंने ईरान के विरुद्ध परमाणु प्रतिबंधों की घोषणा कर दी। राजनैतिक टीकाकार रिचर्ड सोकोलस्की के अनुसार क्षेत्र में ईरान से मुक़ाबले के संदर्भ में अमरीकी राष्ट्रपति के पास कोई स्पष्ट रणनीति नहीं है। अमरीका की ओर से परमाणु समझौते से एकपक्षीय रूप से निकल जाने के बावजूद इस अन्तर्राष्ट्रीय समझौते के दूसरे पक्ष इसको सुरक्षित रखने पर बल दे रहे हैं। गुट चार धन एक, के सारे सदस्य देश अमरीका के इस फैसले को स्वीकार नहीं करते। एक अन्तर्राष्ट्रीय संस्था के रूप में संयुक्त राष्ट्रसंघ भी जेसीपीओए के सुरक्षित रखे जाने पर बल देता आया है। यह बात इसलिए अधिक महत्व रखती है कि इस वैश्विक संस्था का दायित्व, विश्व शांति एवं सुरक्षा की हिफ़ाज़त करना है। राष्ट्रसंघ की महासभा के प्रमुख "मारिया फेरनानंदा एस्पीनोसा" ने 8 मार्च को कहा है कि जेसीपीओए, सर्वसम्मति से प्राप्त होने वाला समझौता है अतः सबको इसके प्रति कटिबद्ध रहना चाहिए। उन्होंने कहा कि इस समझौते पर हस्ताक्षर करने वाले सभी देशों को इसका सम्मान और समर्थन करना चाहिए।
संयुक्त राष्ट्रसंघ की ओर से यह घोषणा जेसीपीओए जैसे अन्तर्राष्ट्रीय घोषणापत्र के समर्थन की पुष्टि के अर्थ में है। विश्व के विभिन्न देशों के अधिकारियों और वैश्विक संस्थाओं के दृष्टिकोण यह दर्शाते हैं कि विश्व समुदाय, परमाणु समझौते के बारे में अमरीकी राष्ट्रपति के दृष्टिकोण से सहमत नहीं है। 26 सितंबर 2018 को ट्रम्प ने सुरक्षा परिषद की बैठक में इस परिषद के सभी सदस्यों से मांग की थी कि वे अमरीका के साथ सहयोग करें और यह सुनिश्चित करें कि, उन्हीं के कथनानुसार, ईरान कभी भी परमाणु बम तक पहुंच न बना सके। डोनाल्ड ट्रम्प की आशा के विपरीत राष्ट्रसंघ की सुरक्षा परिषद के स्थाई और अस्थाई सदस्य जेसीपीओए के संदर्भ में ट्रम्प से पूरी तरह से असहमत हैं।
वास्तव में अन्तर्राष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेन्सी आईएईए अपनी कई रिपोर्टों में जेसीपीओए के प्रति तेहरान की कटिबद्धता की पुष्टि कर चुकी है। यही कारण है कि यूरोपीय संघ का प्रयास है कि ईरान को परमाणु समझौते में बाक़ी रखने के लिए उसके साथ सहयोग किया जाए और इसी विषय के दृष्टिगत उन्होंने ईरान के लिए इन्सटेक्स अर्थात विशेष वित्तीय पैकेज का प्रबंध किया है।