शत्रु के आक्रमण का डटकर मुक़ाबला किया जाएः वरिष्ठ नेता
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इस्लामी क्रांति के वरिष्ठ नेता ने कहा है कि शत्रु के आक्रमण का भरपूर अंदाज़ में जवाब दिया जाए।
(last modified 2023-04-09T02:55:50+00:00 )
Mar १४, २०१९ १३:५२ Asia/Kolkata
  • शत्रु के आक्रमण का डटकर मुक़ाबला किया जाएः वरिष्ठ नेता

इस्लामी क्रांति के वरिष्ठ नेता ने कहा है कि शत्रु के आक्रमण का भरपूर अंदाज़ में जवाब दिया जाए।

आयतुल्लाहिल उज़्मा सैयद अली ख़ामेनेई ने कहा है कि शत्रु की पूरी क्षमता वाले आक्रमण के मुक़ाबले में ईरानी राष्ट्र ईश्वर पर भरोसा करते हुए अपनी क्षमताओं का अधिक से अधिक प्रयोग करे तो ईश्वर, ईरान के महान राष्ट्र के संबन्ध में अपने सच्चे वादे को पूरा करेगा।  वरिष्ठ नेता ने गुरुवार को तेहरान में ख़ुबरगान अर्थात विशेषज्ञ असेंब्ली के सदस्यों से भेंट में इस संबन्ध में चर्चा की है कि विभिन्न चुनौतियों के मुक़ाबले में देश और देश के प्रभावशाली लोगों की क्या भूमिका हो और इस बारे में सर्वमान्य नीति बनाई जाए।  उन्होंने कहा कि देश के आंतरिक मामलों में शत्रु और उसके समर्थक, अपनी पूरी क्षमता के साथ शत्रु को सशक्त दर्शाने के प्रयास कर रहे हैं।  वे यह दर्शाना चाहते हैं कि मानो देश को ऐसी असंख्य समस्याओं का सामना है जिनका समाधान संभव ही नहीं है।

वरिष्ठ नेता ने क्षेत्रीय विषयों के बारे में कहा कि हमें इस वास्तविकता को समझना चाहिए कि क्षेत्रीय स्तर पर ईरान के महत्व के कारण शत्रु इस्लामी गणतंत्र ईरान की क्षमता से भयभीत है।उन्होंने कहा कि ऐसे में जो लोग क्षेत्र में ईरान की उपस्थिति के संबन्ध में अनुचित बातें करते हैं वे वास्तव में शत्रु की सहायता कर रहे हैं।  वरिष्ठ नेता ने अमरीका तथा यूरोप के साथ व्यवहार की शैली की ओर संकेत करते हुए कहा कि ईरान के पास इनके क्रियाकलापों का लंबा अनुभव है।  उन्होंने कहा कि परमाणु समझौते या जेसीपीओए के संदर्भ में अमरीकी उल्लंघनों का व्यवहार सबके सामने है।  वरिष्ठ नेता ने कहा कि अमरीका के साथ व्यवहार में इन अनुभवों से लाभ उठाने की आवश्यकता है।

आयतुल्लाहिज उज़्मा सैयद अली ख़ामेनेई ने कहा कि ईरानी राष्ट्र का वास्तविक शत्रु अमरीका है।  उन्होंने कहा कि राष्ट्र ने अपने शत्रु को पहचाने में कोई ग़लती नहीं करेगा।  वरिष्ठ नेता के अनुसार इस्लामी व्यवस्था को इस बात की अपेक्षा कदापि नहीं है कि विश्व वर्चस्ववाद, ईरानी राष्ट्र के सामने खामोश हो जाएगा।  उन्होंने कहा कि साॅफ्ट वार के मुक़ाबले में शत्रु से सुरक्षित रहने के लिए सीमा का निर्धारण आवश्यक है क्योंकि भौगोलिक सीमाओं की ही भांति सांस्कृतिक सीमाओं को स्पष्ट करके उनकी सुरक्षा की आवश्यकता है।  यह इसलिए आवश्यक है ताकि शत्रु, धोखे या मक्कारी से इन सीमाओं को लांघने न पाए और देश की सांस्कृतिक सीमा पर नियंत्रण स्थापित कर ले।

इस्लामी क्रांति के वरिष्ठ नेता ने अमरीकियों की ओर से ईरानी राष्ट्र के विरुद्ध कड़े से कड़े प्रतिबधों पर आधारित वक्तव्यों की ओर संकेत करते हुए कहा कि उन्होंने ईरान के विरुद्ध अपनी पूरी क्षमता के अनुसार कार्यवाही की है।  वरिष्ठ नेता का कहना है कि अगर ईरानी राष्ट्र अपनी क्षमताओं का अधिक से अधिक प्रयोग करे तो इन्शाल्लाह, अमरीका को इतिहास की सबसे बड़ी पराजय का स्वाद चखाया जा सकता है।