यूरोपीय देश अमेरिका की सेवा कर रहे हैं" जवाद ज़रीफ़
ईरान की मिसाइल क्षमता के बारे में यूरोपीय देशों के दावों का लक्ष्य परमाणु समझौते पर अमल करने के संबंध में अपनी ज़िम्मेदारियों से भागना है।
विदेशमंत्री ने कहा है कि ईरान के मिसाइल कार्यक्रम के खिलाफ तीन यूरोपीय देशों का पत्र एक प्रकार का उल्लंघन और अमेरिका की सेवा है।
विदेशमंत्री जवाद ज़रीफ़ ने ट्वीट करके कहा कि अमेरिका द्वारा परमाणु समझौते से निकल जाने के एक वर्ष बाद यूरोप के अंदर इस बात की ताकत नहीं है कि वह अमेरिका के आर्थिक आतंकवाद को चुनौती दे सके, यही नहीं उसके अंदर इस बात की भी क्षमता नहीं है कि वह मानवता प्रेमी सहायता के लिए बैंकिन्ग व्यवस्था बना सके।
विदेशमंत्री ने स्पष्ट किया कि इस प्रकार की परिस्थिति में तीन यूरोपीय देश ईरान की रक्षा क्षमता के बारे में राष्ट्रसंघ पर दबाव डालकर अमेरिकी राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप की प्रसन्नता प्राप्त करने की चेष्टा में हैं।
राष्ट्रसंघ में जर्मनी, ब्रिटेन और फ्रांस के राजदूतों ने मंगलवार को इस संघ के महासचिव के नाम एक पत्र लिखकर दावा किया है कि ईरान ने दो बैलेस्टिक मिसाइलों का अनावरण करके और अंतरिक्ष में उपग्रह भेजकर सुरक्षा परिषद के प्रस्ताव नंबर 2231 का उल्लंघन किया है।
ईरान की मिसाइल क्षमता के बारे में यूरोपीय देशों के दावों का लक्ष्य परमाणु समझौते पर अमल करने के संबंध में अपनी ज़िम्मेदारियों से भागना है।
अमेरिका के परमाणु समझौते से निकल जाने के बाद यूरोपीय देशों ने बल देकर कहा था कि वे परमाणु समझौते के प्रति कटिबद्ध रहेंगे और इस बात का प्रयास करेंगे कि ईरान परमाणु समझौते के आर्थिक हितों से लाभांवित हो जबकि इस समय प्रतीत यह हो रहा है कि यूरोप के पास न केवल इस चीज़ का इरादा नहीं है बल्कि वह इस चीज़ का उल्लंघन भी कर रहा है।
यूरोपीय देशों का बहाना और उस दावे को दोहराना जिसका संबंध सुरक्षा परिषद के प्रस्ताव नंबर 2231 से नहीं है इस बात का सूचक है कि यूरोप भी भरोसे के लायक नहीं है और वह भी अमेरिकी इरादे से हटकर काम नहीं करना चाहता।
ईरान के साथ आर्थिक लेन- देन के लिए यूरोप की वित्तीय व्यवस्था का व्यवहारिक न होना और यह दावा, कि ईरान ने सुरक्षा परिषद के प्रस्ताव नंबर 2231 का उल्लंघन किया है, इस बात का परिचायक है कि यूरोप ने भी ट्रंप का रास्ता अपना लिया है।
बहरहाल ईरान पश्चिम के राजनीतिक हो- हल्ले पर ध्यान दिये बिना अपनी रक्षा शक्ति को मज़बूत कर रहा है और इस संबंध में वह किसी से वार्ता नहीं करेगा और सशस्त्र सेना के कमांडर ब्रिगेडियर जनरल मोहम्मद बाकिरी के उस बयान के इसी परिप्रेक्ष्य में देखा जा सकता है जिसमें उन्होंने बारमबार बल देकर कहा है कि मिसाइल सहित ईरान की रक्षा क्षमता पर वार्ता नहीं की जा सकती। MM