दूसरे देशों के ख़िलाफ़ प्रतिबंध लगाने का अमरीकी इतिहास
अमरीका ने किसी भी देश की तुलना में विश्व के अन्य देशों के ख़िलाफ़ प्रतिबंध लगाए हैं। यह प्रतिबंध विभिन्न आरोपों और बहानों के आधार पर लगाए जाते हैं।
हालांकि अमरीका के इस रवैये में डोनल्ड ट्रम्प के राष्ट्रपतिकाल में अत्यधिक वृद्धि आ गई है। ट्रम्प के इस व्यवहार से विश्व समुदाय और अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं की चिंता बढ़ गई है। इसका एक स्पष्ट उदाहरण, परमाणु समझौते से बाहर निकलने के बाद ईरान के ख़िलाफ़ एकपक्षीय प्रतिबंधों का लागू करना है।
संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार परिषद के रिपोर्टर इदरीस जज़ायरी ने ईरान, क्यूबा और वेनेज़ुएला के ख़िलाफ़ अमरीका के एकपक्षीय प्रतिबंधों पर चिंता जताई है। जज़ायरी ने कहा है कि राजनीतिक हितों के लिए आर्थिक प्रतिबंध लगाना, मानवाधिकारों का खुला उल्लंघन है। तुर्की, चीन और भारत के आग्रह के बावजूद, इन देशों को ईरान से तेल आयात करने की छूट न देना, चिंता का विषय है।
उनका मानना है कि किसी भी देश के ख़िलाफ़ एकपक्षीय प्रतिबंध, अंतरराष्ट्रीय क़ानूनों का भी उल्लंघन है। उन्होंने आगे कहा, हक़ीक़त में मैं इस समस्या को लेकर चिंतित हूं कि किस तरह कोई देश कि जिसका विश्व वित्तीय सिस्टम पर एकाधिकार है, उसका दुरुपयोग कर रहा है और परमाणु समझौते का पालन करने के बावजूद ईरानी जनता को नुक़सान पहुंचा रहा है।
इस बीच, ईरान के ख़िलाफ़ अमरीका की शत्रुतापूर्ण कार्यवाहियों के चलते अमरीका के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार और युद्धोन्मादी अधिकारी जान बोल्टन ने ईरान के ख़िलाफ़ सैन्य कार्यवाही की धमकी दी है।
जान बोल्टन ने दावा किया कि अमरीका ईरान से युद्ध नहीं चाहता लेकिन ईरानी फ़ोर्सेज़ के किसी भी हमले का जवाब देने के लिए पूरी तरह तैयार है।
विशेषज्ञों का मानना है कि अमरीका का यह एक भड़काऊ और उन्मादी क़दम है और इससे क्षेत्र या विश्व में शांति की स्थापना में कोई मदद नहीं मिलेगी।
इस अवसर पर बोल्टन ने ईरान को धमकी देते हुए जो संक्षिप्त बयान जारी किया है, इस पर कई सवाल खड़े हो गए हैं।
ईरान का मुक़ाबला करने का दावा करते हुए अमरीका द्वारा मध्यपूर्व में विमान वाहक युद्ध पोत का तैनात किया जाना कोई असामान्य बात नहीं है। लेकिन इस क़दम को जो बात असमान्य बना रही है वह बोल्टन का भड़काऊ बयान है।
मई 2018 में अमरीका ने परमाणु समझौते से निकलने के बाद ईरान पर फिर से प्रतिबंध लागू करने की घोषणा की थी और तेहरान को अलग थलग करने का एक बार फिर प्रयास किया, जो असफल होता नज़र आ रहा है।
इसी असफलता के कारण ट्रम्प प्रशासन क्रोधित है और वह क्षेत्र को एक और विनाशकारी युद्ध में धकेलना का प्रयास कर रहा है।