ईरान अमेरिका से वार्ता नहीं करेगाः वरिष्ठ नेता
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ईरान की तर्कसंगत नीति ने अधिक से अधिक दबाव डालने की ट्रंप की नीति को विफल बना दिया है
(last modified 2023-04-09T02:55:50+00:00 )
May ३०, २०१९ १२:२५ Asia/Kolkata

ईरान की तर्कसंगत नीति ने अधिक से अधिक दबाव डालने की ट्रंप की नीति को विफल बना दिया है

ईरान की इस्लामी क्रांति के वरिष्ठ नेता ने एक बार फिर बल देकर कहा है कि ईरान अमेरिका से वार्ता नहीं करेगा। साथ ही वरिष्ठ नेता आयतुल्लाहिल उज़्मा सैयद अली ख़ामनेई ने कहा कि अमेरिका से वार्ता न करने की पहली वजह यह है कि इस वार्ता का कोई फायदा नहीं है और दूसरे यह कि यह वार्ता हानिकारक भी है।

वरिष्ठ नेता ने कहा कि अमेरिकियों के पास अपने लक्ष्यों तक पहुंचने के लिए एक स्ट्रैटेजी एवं एक टैक्टिक होती है। उनकी स्ट्रैटेजी, दबाव डाल कर सामने वाले पक्ष को थका देनी होती है और उसके बाद दबाव के पूरक के रूप में वार्ता का प्रस्ताव देते हैं ताकि अपने लक्ष्यों तक पहुंच सकें।

साथ ही वरिष्ठ नेता ने बल देकर कहा कि अमेरिकी दबावों के मुकाबले में ईरान के पास भी दबाव के आश्यक संसाधन मौजूद हैं और यह सैनिक दबाव नहीं है जबकि वह प्रचार करते हैं कि ईरान का दबाव सैनिक है अलबत्ता ज़रूरत पड़ने पर वह भी है।

ईरान के पास दबाव डालने के विभिन्न संसाधन व हथकंडे हैं। पहला राजनीतिक हथकंडा है। ईरान ने परमाणु समझौते से जुड़ी दो प्रतिबद्धताओं पर अमल करना छोड़ दिया है। साथ ही ईरान ने यूरोपीय सरकारों को 60 दिन का समय दिया है कि वह उस क्षति की भरपाई करें जो परमाणु समझौते से अमेरिका के निकल जाने से ईरान को पहुंची है।

अगर यूरोपीय देशों ने इस अवधि से लाभ नहीं उठाया तो ईरान परमाणु समझौते के परिप्रेक्ष्य में अगला कदम उठायेगा जो ज़रूरत पड़ने की स्थिति में अधिक तीव्र होगा।

इस्लामी क्रांति के वरिष्ठ नेता ने ईरान की ओर से कुछ प्रतिबद्धताओं पर अमल न किये जाने की ओर संकेत किया और कहा कि अगर सही समय पर राजनीतिक दबाव का प्रयोग नहीं किया गया तो सामने वाला पक्ष यह समझेगा कि उसे कोई नुकसान नहीं पहुंचेगा और किसी प्रकार की जल्दी के बिना वह अपने कार्य को जारी रखेगा परंतु अगर राजनीतिक दबाव का प्रयोग किया गया तो वह इस सोच में पड़ जायेगा कि कुछ करना चाहिये।  

रूस के उप विदेशमंत्री सरगेई रियावकोफ़ ने भी बुधवार को तेहरान में बल देकर कहा कि अगर अमेरिकी यह सोचते हैं कि वे दबाव डालकर इस्लामी गणतंत्र ईरान को झुकने पर बाध्य कर सकते हैं तो वे भारी भूल में हैं।

बहरहाल ईरान की तर्कसंगत नीति ने अधिक से अधिक दबाव डालने की ट्रंप की नीति को विफल बना दिया है और ईरान के मुकाबले में ट्रंप सरकार की प्रतिदिन बदलती नीति को इसी परिप्रेक्ष्य में देखा जा सकता है। MM