ईरान किसी भी देश के साथ लड़ाई व विवाद नहीं चाहता" रूहानी
कतर समस्त क्षेत्रों में ईरान के साथ संबंधों को विस्तृत करने का इच्छुक है
राष्ट्रपति ने कहा है कि ईरान क्षेत्र की मज़बूती चाहता है और वह किसी भी देश के साथ लड़ाई व विवाद नहीं चाहता परंतु अगर उनमें से किसी पक्ष की ओर से अनुचित कार्यवाही आरंभ की जायेगी तो उसका जो जवाब दिया जायेगा वह पछताने पर विवश कर देगा।
राष्ट्रपति डॉक्टर हसन रूहानी ने बुधवार को कतर नरेश शैख़ तमीम बिन हमद आले सानी से टेलीफोनी वार्ता में बल देकर कहा कि सैनिक मार्गों से क्षेत्रीय समस्याओं का समाधान नहीं किया जा सकता और धमकी, दबाव, परिवेष्टन और आर्थिक प्रतिबंध सरकारों के संबंध में गलत चीज़ है।
कतर नरेश ने भी इस टेलीफोनी वार्ता में कहा कि तनावों को कम करने का एकमात्र मार्ग वार्ता है और कतर समस्त क्षेत्रों में ईरान के साथ संबंधों को विस्तृत करने का इच्छुक है।
ईरान और कतर फार्स की खाड़ी के दो महत्वपूर्ण देश हैं और क्षेत्रीय समस्याओं के बारे में दोनों देशों के लगभग समान दृष्टिकोण हैं और वे सदैव कूटनयिक वार्ता का समर्थन करते हैं।
आजकल अमेरिका ईरान पर अधिक से अधिक दबाव डालने की चेष्टा में है और कुछ अरब देश उसकी हां में हां मिला रहे हैं ऐसी स्थिति में ईरान और कतर तार्किक दृष्टिकोण अपना कर क्षेत्र की शांति व सुरक्षा को मज़बूत बनाने और एक दूसरे से विचार- विमर्श को अपनी विदेश नीति की प्राथमिकता बनाये हुए हैं।
कतर द्वारा कूटनयिक वार्ता का समर्थन वह बिन्दु है जिसे इस्लामी गणतंत्र ईरान ने अपनी विदेश नीति का आधार बना रखा है और अभी हाल में ईरान के विदेशमंत्री मोहम्मद जवाद ज़रीफ़ ने किसी पड़ोसी देश पर हमला न करने के समझौते पर हस्ताक्षर करने का जो सुझाव दिया है उससे ईरान की नीति पहले से अधिक प्रतिबिंबित हुई है और कतर सरकार द्वारा ईरान के विदेशमंत्री के सुझाव का स्वागत इस बात का सूचक है कि क्षेत्र की स्वतंत्र सरकारें क्षेत्रीय समस्याओं के समाधान के मार्ग को जानती हैं और वे केवल शांति व सुरक्षा को मजबूत बनाने के लिए प्रयास नहीं कर रही हैं।
अभी सऊदी अरब के मक्का नगर में दो बैठके हुईं थीं और इन दोनों बैठकों में क्षेत्रीय समस्याओं के समाधान के लिए प्रयास किये जाने के बजाये किसी आधार के बिना ईरान पर निराधार आरोप मढ़े गये। इस प्रकार की परिस्थिति में कतर के विदेशमंत्री ने बल देकर कहा कि मक्का बैठक की समाप्ति पर जारी होने वाली विज्ञप्तियां केवल ईरान विरोधी थीं और कतर सरकार उनका समर्थन नहीं करती है।
इसी प्रकार कतर के विदेशमंत्री ने कहा कि दूसरे मामलों से आंख नहीं मूंदना चाहिये और सारा ध्यान ईरान पर केन्द्रित रहे क्योंकि हम देख रहे हैं कि कुछ अरब देशों पर रोज़ बमबारी की जाती है और कुछ राष्ट्र इन दिनों बड़ी समस्याओं से जूझ और उनका सामना कर रहे हैं।
बहरहाल ईरान और कतर रचनात्मक वार्ता के पक्षधर हैं और यह चीज़ पूरे क्षेत्र के हित में है। MM