अमरीका कमज़ोरी और लाचारी का शिकार हैः विदेशमंत्री
इस्लामी गणतंत्र ईरान के विदेशमंत्री मुहम्मद जवाद ज़रीफ़ ने अमरीका की विध्वंसक नीतियों की ओर संकेत करते हुए बल दिया कि अमरीका की नीतियां, केवल ईरान को ही लक्ष्य नहीं बनाए हुए हैं बल्कि पूरी दुनिया को निशाने पर लिए हुए हैं।
उन्होंने रविवार को पत्रकारों से बात करते हुए कहा कि दुनिया के बहुत से देशों ने अमरीका की एकपक्षीय नीतियों से स्वयं को अलग कर लिया है। विदेशमंत्री ने कहा कि अमरीका कमज़ोरी और लाचारी की वजह से ईरान पर दबाव डाल रहा है और इस्लामी गणतंत्र ईरान इन दबावों को बड़ी सफलता के साथ पार कर लेगा।
विदेशमंत्री ने आर्थिक लेनदेन में डॉलर प्रयोग न करने पर आधारित रूस और चीन के निर्णय की ओर संकेत करते हुए कहा कि अमरीका का आर्थिक युद्ध दुनिया को नुक़सान पहुंचा रहा है इसीलिए इस नीति को रुकना चाहिए।
विदेशमंत्री ने ईरान की मीज़ाइल और रक्षा क्षमताओं के फोटोशाप होने पर आधारित अमरीकी विदेशमंत्रालय में ईरान एक्शन ग्रुप के प्रमुख ब्राएन हुक के दावे पर प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए कहा कि वह देख लेंगे।
विदेशमंत्री ने यह बयान करते हुए कि कुछ क्षेत्रीय देश सोचते हैं कि ज़ायोनी शासन उनकी मदद कर सकता है, कहा कि अगर होता तो ज़ायोनी शासन अपनी ही मदद कर पाता न यह कि हर दिन यह शासन तनाव और संकट का सामना करता ।
इससे पहले विदेशमंत्री ने तेहरान में आयोजित एक कार्यक्रम में कहा था कि यूरोपीय देश उस स्थान पर नहीं है कि ईरान पर यहां तक कि उन क्षेत्रों में जिनका कोई संबंध परमाणु समझौते से नहीं है, आलोचना करें।
विदेशमंत्री ने कहा कि परमाणु समझौते में कार्यवाहियां महत्वपूर्ण नहीं हैं बल्कि परिणाम महत्वपूर्ण होता है। उन्होंने कहा कि यूरोपीय देश और परमाणु समझौते के अन्य सदस्य देशों की यह ज़िम्मेदारी है कि वह ईरान के आर्थिक संबंधों को सामान्य बनाएं।
इस्लामी गणतंत्र ईरान के विदेशमंत्री ने ईरानी सरकार की ओर से परमाणु समझौते के दूसरे पक्षों को 60 दिन की मोहलत देने के बारे में कहा कि यदि उन्होंने अपने वचनों पर अमल न किया तो हम दूसरी कार्यवाहियां अंजाम देंगे।
विदेशमंत्री ने पश्चिमी एशिया के क्षेत्र में पश्चिमी देशों के हस्तक्षेप की कड़ी आलोचना करते हुए कहा कि पश्चिमी देशों की हस्तक्षेपपूर्ण कार्यवाहियों का परिणाम केवल नुक़सान के अलावा कुछ और नहीं निकला।
उन्होंने कुछ विदेशी अधिकारियों के ईरान दौरे का हवाला देते हुए कहा कि जापानी प्रधानमंत्री और जर्मन विदेशमंत्री के तेहरान दौरे, राष्ट्रपति रूहानी का बेश्किक और दोशंबा दौरा और इन देशों के राष्ट्रपतियों और वरिष्ठ अधिकारियों से मुलाक़ात, अपनी नीतियों पर प्रकाश डालीने और समस्त देशों के विरुद्ध अत्याचारपूर्ण नीतियों से मुक़ाबला करने के लिए एक उचित अवसर है।
ज्ञात रहे कि जापान के विदेशमंत्री 12 जून को ईरानी अधिकारियों से भेंटवार्ता के लिए ईरान का दौरा करेंगे जबकि जर्मनी के विदेशमंत्री सोमवार को तेहरान पहुंच रहे हैं। (AK)