अमरीकी प्रतिबंधों को ब्लूमबर्ग और सीएनएन ने बताया प्रभावहीन और अनोखी परम्परा!
ईरान पर अमरीका की ओर से लगाए गए प्रतिबंधों पर अमरीका के भीतर से प्रतिक्रियाएं आ रही हैं। अमरीकी मैगज़ीन ब्लूमबर्ग ने लिखा है कि ईरान की अर्थ व्यवस्था में अब बहुत कम ही चीज़ें बची हैं जो अमरीकी प्रतिबंधों के निशाने पर नहीं हैं।
ब्लूमबर्ग के अनुसार अमरीका पहले ही ईरान की अर्थ व्यवस्था में तेल सेक्टर, बैंकिंग सेक्टर और स्टील उद्योग पर प्रतिबंध लगा चुका है अब बहुत कम टारगेट बचे हैं जिनमें विशेष प्रकार की चीज़ों का निर्यात है जिस पर अब तक प्रतिबंध नहीं लगाया गया था, ट्रम्प ईरान के सेंट्रल बैंक को भी प्रतिबंधों का निशाना बना सकते हैं लेकिन यह मानवता प्रेमी व्यापार को भी नुक़सान पहुंचाएगा।
उल्लेखनीय है कि अमरीका ने ईरान की लगभग 1 हज़ार संस्थाओं पर प्रतिबंध लगाए हैं। अमरीका की ओर से लगाए गए प्रतिबंधों के बारे में कहा जा रहा है कि इसके दायरे में विदेश मंत्री जवाद ज़रीफ़ भी आ गए हैं जिस पर अमरीकी न्यूज़ चैनल सीएनएन ने कहा कि ज़रीफ़ पर प्रतिबंध लगाने का मतलब यह है कि अमरीका कूटनीति के हर अवसर का गला घोंट देना चाहता है।
सीएनएन की वरिष्ठ अंतर्राष्ट्रीय विशलेषक मिशेल कोज़िन्सकी ने कहा कि इसका पहले कोई और उदाहरण नहीं है कि अमरीकी सरकार ने किसी देश के नेता पर प्रतिबंध लगाया हो, यहां तक कि रूस के राष्ट्रपति व्लादमीर पुतीन पर भी प्रतिबंध नहीं लगाया गया।
सीएनएन की टीकाकार कोज़िन्सकी ने कहा कि नई परम्परा शुरू कर दी है जिसका उद्देश्य परमाणु समझौते को नुक़सान पहुंचाना है जबकि बड़ी संख्या में अंतर्राष्ट्रीय टीकाकार यह मानते हैं कि वर्तमान स्थिति ख़ुद अमरीका की गतिविधियों के कारण पैदा हुई है। उन्होंने कहा कि यदि अमरीका परमाणु समझौते से न निकलता तो इस प्रकार के हालात पैदा नहीं होते।