अमरीकी स्क्रिप्ट पर ब्रिटेन की अदाकारी
ब्रिटेन की नौसेना ने जिबराल्टर स्ट्रेट में ईरान के आयल टैंकर को रोक लिया और इसके बारे में दावा किया कि वह सीरिया की ओर जा रहा था।
ब्रिटिश अधिकारियों ने गुरुवार को कहा कि ईरानी आयल टैंकर अमरीकी प्रतिबंधों और यूरोपीय संघ के प्रतिबंधों का उल्लंघन कर रहा था जो वर्ष 2011 में सीरिया पर लगाए गए थे।
यह बात अपनी जगह कि ईरानी आयल टैंकर पूरी तरह क़ानूनी प्रक्रिया के तहत अपनी यात्रा कर रहा था, ब्रिटेन की नौसेना ने इस आयल टैंकर को रोक कर वास्तव में समुद्री डाकुओं जैसी हरकत की है। ब्रिटिश नौसेना ने अमरीकी सरकार की मांग पर जो हरकत की है उससे वह एक ख़तरनाक परम्परा बन सकती है। अंतर्राष्ट्रीय जल क्षेत्र में इस प्रकार के ग़ैर क़ानूनी कामों से साबित होता है कि अब ब्रिटेन जैसे देश की नौसेना भी समुद्र डाकुओं की राह पर चल पड़ी है।
ईरान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता अब्बास मूसवी ने गुरुवार की रात विदेश मंत्रालय में ब्रिटिश राजदूत को तलब किए जाने का हवाला देते हुए कहा कि ईरान के आयल टैंकर को रोकना ग़ैर क़ानूनी और उत्तेजक क़दम है तथा ख़तरनाक परम्परा है। अपनी धरती के बाहर एकपक्षीय रूप से प्रतिबंधों को लागू करवाना अमरीका की ख़तरनाक परम्परा है और ब्रिटेन भी उसी परम्परा पर चल रहा है।
अपनी धरती के बाहर अपने एकपक्षीय प्रतिबंधों को लागू करने की अमरीका की नीति का यूरोपीय संघ ने विरोध किया लेकिन ब्रिटेन ने अमरीका की इस नीति पर अमल करना शुरू कर दिया है। इससे अंतर्राष्ट्रीय मंच पर तनाव बढ़ने के अलावा कुछ नहीं होगा।
ब्रिटेन के इस क़दम से यह भी साबित हो गया कि यूरोप अमरीका के दबाव से बाहर नहीं निकल सका है और वह अब भी आज़ाद विदेश नीति अपनाने की हिम्मत नहीं जुटा पा रहा है।